East Singhbhum News : किसानों को आठ माह बाद भी नहीं मिला धान का पैसा

लैंपस के अध्यक्ष-सचिव पर मनमानी का आरोप

डुमरिया. डुमरिया के किसान हर साल दोहरी मार झेलते हैं. किसान लैंपस में धान बेचते हैं, ताकि सरकारी मूल्य प्राप्त हो सके. लेकिन लैंपस के अध्यक्ष-सचिव की मनमानी से किसानों को समय पर धान का दाम नहीं मिलता. यही वजह हैं कि किसान मजबूरन 15-16 रुपये किलों के भाव से अपना धान व्यापारियों को बेचते हैं. खड़िदा पंचायत के भागाबांदी लैंपस में जनवरी की किसानों की धान की किस्त की राशि अब तक किसानों को नहीं मिली है, लैंपस से किसानों को जबाव दिया जाता है कि हम यहां से जिला भेज चुके है, जिला से ही बकाया राशि का भुगतान होगा अब किसान कहां का चक्कर लगाये. किसानों का कहना है कि धान की रकम एक मुश्त किसानों को मिलनी चाहिये. किसानों को लैंपस के धान क्रय केंद्र में धान बेचने को लिए भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है. लैंपस में व्यापारी हावी होने से किसान आसानी से धान नहीं दे पाते. नमी के नाम पर मार्च, अप्रैल तक प्रति क्विंटल पांच किलो धान जबरन किसानों का काटा जाता है. जिसका उल्लेख रशीद में नहीं होता. लैंपस वाले रशीद देने में महीनों लगा देते हैं. धान क्रय केंद्र में किसानों से धान लेने के लिए 48 घंटे के अंदर धान का पहला किस्त किसानों के खाते में भेजने का सरकारी प्रावधान है, लेकिन डुमरिया प्रखंड में यह नियम लागू नहीं होता. डुमरिया के लैंपसों में न तो किसानों को बीज प्रदान की जाता है और न ही खाद, किसान उंचे दामों पर बीज व खाद खरीदने के लिए विवश हैं.

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Author: ATUL PATHAK

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