East Singhbhum News : गुड़ाबांदा प्रखंड की आठ पंचायतों में गर्मी के पहले पेयजल संकट

लोग नदी, कुआं व नाला 
का पानी पीने को विवश दूरदराज से लाते हैं पानी

गुड़ाबांदा. गुड़ाबांदा प्रखंड की आठ पंचायतों में 93 गांवों की करीब 60 हजार आबादी गर्मी शुरू होने के पहले से पेयजल संकट से जूझने लगी है. प्रखंड के गांवों में तीन प्रकार के फंड से जलमीनारें लगी हैं. इनमें मुख्यमंत्री जल नल एसटी/एससी योजना से 138, डीएमएफटी फंड से 43 और पीवीटीजी फंड से 31 सोलर जलमीनार हैं. अप्रैल, 2025 तक प्रखंड में कुल 213 जलमीनार व 1365 चापाकल हैं. इनमें से कुछ चालू, तो कुछ बेकार पड़े हैं. करीब 200 चापाकल खराब हैं. लोग नदी, कुआं व नाला का पानी पीने को विवश हैं. पेयजल के लिए दूरदराज क्षेत्र में जाना पड़ता है.

जल-नल योजना में बंदरबांट का आरोप:

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रखंड में जल-नल योजना में सिर्फ बंदरबांट हुई है. ज्यादातर सोलर जलमीनार से पानी नहीं मिल रहा है. लगभग 200 चापाकल खराब पड़े हैं. जलमीनारों में किसी का सोलर प्लेट टूटा है, तो कहीं लोहे का स्ट्रक्चर जंग लगने से टूट हुए हैं. लकड़ी का सहारा देकर खड़ा रखा गया है. गर्मी से पहले सुधार नहीं किया गया, तो परेशानी बढ़ेगी.

84 करोड़ की योजना अधूरी, कई घरों में संयोजन नहीं:

गुड़ाबांदा प्रखंड में 84 करोड़ रुपये की योजना है. वर्तमान में अंतिम चरण में टेस्ट ट्रायल कई माह से चल रहा है. कई गांवों में अबतक कनेक्शन तक नहीं हुआ है. ऐसे में ट्रायल पर सवाल उठ रहे हैं. इधर, गांव के चौक-चौराहे पर चर्चा है कि प्रखंड के लगभग 3 हजार 700 घरों में प्रत्येक परिवार को एक- एक लाख रुपये देने पर 37 करोड़ रुपये खर्च होते. वहीं, प्रत्येक परिवार में जलापूर्ति भी सही ढंग से हो पाती.

कनेक्शन नहीं मिलने से आक्रोश

प्रखंड के कासियाबेड़ा गांव स्थित झींगाबेड़ा टोला में सात परिवार को कनेक्शन नहीं मिला है. ग्रामीण नाराज हैं. छूटे लोगों में बति बेसरा, सोमाय बेसरा, बुधु मुर्मू, भीमा मुर्मू, झानो मुर्मू, सोनाली हांसदा समेत अन्य मौजूद हैं.

ग्रामीण बोले- कुआं भी सूखने लगे हैं

ग्रामीण बुद्धेश्वर बास्के ने कहा कि गर्मी आते ही कुआं सूखने लगे हैं. पानी की समस्या हो गयी है. प्रखंड में जलमीनार बने हैं, पर पानी नहीं मिल रहा है. जेएलकेएम नेता निखिल महतो ने कहा कि जल-नल योजना के तहत जलमीनार बनी हैं, पर पानी नहीं मिल रहा है. पानी के लिए जद्दोजहद करना पड़ता है.

– गुड़ाबांदा प्रखंड में जितनी जलमीनार खराब है, सभी को गर्मी शुरू होने के पहले दुरुस्त किया जायेगा. जहां जलमीनार नहीं है, वहां नयी जलमीनार लगाने का प्रयास किया जायेगा.

– डांगुर कोड़ाह

, बीडीओ, गुड़ाबांदा

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By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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