East Singhbhum News : विभूति भूषण की कृतियों से अटूट लगाव खींच लाया गौरीकुंज

पाथेर पांचाली और अपराजिता जैसे उपन्यासों ने उनके मन में घाटशिला और उसके आस पास के प्राकृतिक परिवेश को देखने की तीव्र इच्छा जगा दी

घाटशिला. कोलकाता के बारानगर निवासी अशिम रॉय के दिव्यांग पुत्र अद्रिजो रॉय के लिए मंगलवार का दिन यादगार बन गया. साहित्य और प्रकृति से गहरे लगाव रखने वाले अद्रिजो को बचपन से महान साहित्यकार विभूति भूषण बंद्योपाध्याय की रचनाओं से विशेष प्रेम रहा है. पाथेर पांचाली और अपराजिता जैसे उपन्यासों ने उनके मन में घाटशिला और उसके आस पास के प्राकृतिक परिवेश को देखने की तीव्र इच्छा जगा दी थी. इसी सपने को साकार करने अद्रिजो अपने पिता असीम राय और माता मितु राय के साथ घाटशिला पहुंचे. उन्होंने विभूति भूषण की स्मृतियों से जुड़े दाहीगोड़ा स्थित गौरीकुंज परिसर का भ्रमण किया. परिसर में पहुंचकर अद्रिजो की खुशी देखते बन रही थी. उन्होंने वहां रखीं पुस्तकों को ध्यान से देखा, पढ़ा और अपने साथ विभूति बाबू से जुड़ीं पुस्तकें ले गये. अद्रिजो ने कहा कि विभूति भूषण की रचनाएं उनके लिए सिर्फ किताबें नहीं, बल्कि जीवन को देखने का नजरिया हैं.

गौरीकुंज उन्नयन समिति ने साहित्यिक धरोहर को संजोया

मौके पर गौरीकुंज उन्नयन समिति के कार्यों की सराहना की. अद्रिजो और उनके परिजनों ने कहा कि समिति ने साहित्यिक धरोहर को संजोकर रखा है, जिससे नयी पीढ़ी को विभूति भूषण के जीवन और कृतित्व को जानने का अवसर मिल रहा है.

प्रकृति, मानवीय संवेदना और संघर्ष की आवाज थे विभूति बाबू : तापस

अध्यक्ष तापस चटर्जी ने कहा कि विभूति भूषण केवल एक लेखक नहीं, बल्कि प्रकृति, मानवीय संवेदना और संघर्ष की आवाज थे. अद्रिजो जैसे साहित्य प्रेमियों का यहां आना यह साबित करता है कि विभूति बाबू की रचनाएं आज भी लोगों को प्रेरित कर रही हैं. समिति आगे भी धरोहर के संरक्षण और प्रचार के लिए निरंतर प्रयास करती रहेगी.

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By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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