मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई माह में अब तक 167 मिलीमीटर बारिश हुई है. इससे खेतों में पानी का ठहराव होने लगा है. किसानों ने धान की रोपनी शुरू कर दी है. इस बारिश से सुस्त पड़े कृषि कार्यों में फिर रौनक लौट आयी है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. डी. रजक ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में मेढ़बंदी कर वर्षा जल का संचय करें. उन्होंने कहा कि खेतों में पर्याप्त जलजमाव होने से रोपाई के बाद धान के पौधे सूखेंगे नहीं और फसल अच्छी होगी. डॉ. रजक ने बताया कि जून में तैयार बिचड़ों की रोपाई के लिए जुलाई का महीना सबसे उपयुक्त है. हालांकि, यदि मॉनसून की बारिश में देरी होती है, तो किसान 15 अगस्त तक भी धान की रोपाई कर सकते हैं. उन्होंने जल संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि किसान डोभा, तालाब और मेढ़बंदी के माध्यम से पानी बचाएं ताकि जरूरत पड़ने पर सिंचाई की जा सके.
सब्जी फसलों के लिए जल निकासी और वैकल्पिक खेती पर जोर
डॉ. रजक ने सब्जी उत्पादक किसानों को सचेत करते हुए कहा कि खेतों में अधिक पानी जमा होने से सब्जी की फसलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था बेहद जरूरी है. उन्होंने कम पानी वाले और ऊपरी खेतों में मक्का, अरहर, रागी, मूंग, उड़द और मौसमी सब्जियों की खेती करने की अपील की. उन्होंने कहा कि इससे अलनीनो और मौसम की अनिश्चितता के बीच फसल नुकसान का जोखिम कम होगा और किसानों को अतिरिक्त आय भी प्राप्त होगी.
जुलाई माह में कब कितनी बारिश हुई
1 जुलाई: 8.4
2 जुलाई: 21.23 जुलाई: 5.2
4 जुलाई: 8.45 जुलाई: 18.4
6 जुलाई: 15.47 जुलाई: 3.4
8 जुलाई: 3.29 जुलाई: शून्य
10 जुलाई: 21.611 जुलाई: शून्य
12 जुलाई: शून्य13 जुलाई: 2.2
14 जुलाई: 17.615 जुलाई: 10.4
16 जुलाई: 31.6कुल: 167 मिमी
