गुड़ाबांदा में दर्जनों अवैध घाट बनाकर बालू खनन व परिवहन कर रहे तस्कर

गुड़ाबांदा में बालू माफियाओं का आतंक, अवैध घाटों से हो रहा खनन और परिवहन। प्रशासन की मिलीभगत से सरकार को लाखों का चूना, जब्त बालू भी हुआ गायब।

गुड़ाबांदा: गुड़ाबांदा प्रखंड क्षेत्र में बालू की तस्करी का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है. सुवर्णरेखा नदी के तट पर स्थित जामबोनी, पुनशिया, स्वर्गछिड़ा, कोइमा नवाडीह, रेडुआ, बिहिंदा, धोराटोला, मुड़ाठाकड़ा, कन्यालुका, बालीजुड़ी, भाकर और भालकी आदि गांवों के समीप अवैध बालू घाट बनाकर धड़ल्ले से खनन किया जा रहा है. तस्कर सुबह 4 से 9 बजे और रात 7 से 3 बजे तक ट्रैक्टरों के जरिए बालू का अवैध परिवहन कर रहे हैं. गुड़ाबांदा से बालू उठाकर धालभूमगढ़, डुमरिया, मुसाबनी, घाटशिला और चाकुलिया प्रखंडों में 3 से 5 हजार रुपये प्रति ट्रैक्टर की दर पर बेचा जा रहा है. वहीं, रात के अंधेरे में नदी किनारे डंप बालू को हाइवा के माध्यम से जमशेदपुर, रांची तथा पड़ोसी राज्य बंगाल और ओडिशा भेजा जा रहा है. आरोप है कि सत्ता और प्रशासन के संरक्षण के कारण माफियाओं के दिल से कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है.

निजी स्तर पर बालू घाटों की बोली, सरकार को शून्य रॉयल्टी

प्रशासनिक अनदेखी का फायदा उठाकर भालकी और फॉरेस्ट ब्लॉक पंचायत के कई बालू घाटों की स्थानीय स्तर पर निजी तौर पर लाखों रुपये में बोली लगायी जा रही है. इससे सरकार को एक रुपये की रॉयल्टी नहीं मिल रही, जबकि दबंग कारोबारी मालामाल हो रहे हैं. मुसाबनी, डुमरिया, धालभूमगढ़ और गुड़ाबांदा के ट्रैक्टर मालिक तय रकम देकर बालू का उठाव कर रहे हैं. यह जांच का विषय है कि इन घाटों को अवैध रूप से लीज पर कौन दे रहा है. इसका पैसा किसकी जेब में जा रहा है.

वैध लीजधारी भी नियमों की उड़ा रहे धज्जियां

क्षेत्र में एकमात्र वैध बालू घाट गोदावरी कमोडिटी प्राइवेट लिमिटेड के पास है. हालांकि, कंपनी को अब तक स्टॉक प्वाइंट का लीज नहीं मिला है, फिर भी हजारों सीएफटी बालू अवैध रूप से स्टॉक कर लिया गया है. इसके अलावा, घाट और लीज प्वाइंट का सीमांकन (नापी) किये बिना ही धड़ल्ले से काम चलाया जा रहा है.

जब्त 70 हजार सीएफटी बालू चोरी, जांच का आश्वासन

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पूर्व में प्रशासन द्वारा जब्त किया गया 70 हजार सीएफटी से अधिक बालू नीलामी से पहले ही गायब हो गया. 0नकी जिम्मेवारी में जब्त बालू रखा गया था, उनका तुगलकी तर्क है कि बालू बरसात के पानी में बह गया.

क्या कहते हैं अधिकारी

मामले की जांच करायी जाएगी और दोषियों पर उचित कार्रवाई होगी. यदि अभी भी कोई चोरी-छिपे बालू का खनन या परिवहन कर रहा है, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जायेगी. डांगुर कोड़ाह, बीडीओ, गुड़ाबांदा


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लेखक के बारे में

By Mdparwez

मो. युनूस परवेज वर्ष 1995 से पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्होंने घाटशिला महाविद्यालय और रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और राजनीतिक विज्ञान ऑनर्स की डिग्री हासिल की है. इनकी राजनीति, अपराध, नक्सलवाद, खेल, शिक्षा और खेती किसानी की खबरों में विशेष रुचि है. डिजिटल जर्नलिज्म में 5 साल का अनुभव है.

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