Hill Worship For Rain: पूर्वी सिंहभूम के धालभूमगढ़ प्रखंड से सटे देवसोल गांव में मंगलवार को एक अनोखा और आस्था से जुड़ा नजारा देखने को मिला. लंबे समय से बारिश नहीं होने से चिंतित हजारों ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से पहाड़ की पूजा-अर्चना की. स्थानीय लोगों का कहना है कि पूजा संपन्न होते ही क्षेत्र में झमाझम बारिश शुरू हो गई. इससे गांव में खुशी का माहौल बन गया और किसानों के चेहरे खिल उठे.
कई सप्ताह से सुखाड़ जैसे हालात
देवसोल और आसपास के गांवों में पिछले कई सप्ताह से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेत सूखने लगे थे. आषाढ़ का महीना बीतने को था, लेकिन मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी थी. धान की खेती प्रभावित होने लगी थी और ग्रामीणों को आशंका थी कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो फसल उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा. लगातार बढ़ती चिंता के बीच ग्रामीणों ने अपनी परंपरा के अनुसार सामूहिक पहाड़ पूजा करने का निर्णय लिया.
पारंपरिक रीति-रिवाज से हुई पूजा
मंगलवार सुबह गांव के ग्राम प्रधान के नेतृत्व में हजारों ग्रामीण पहाड़ पर एकत्र हुए. महिलाओं, पुरुषों और बुजुर्गों ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की. ग्रामीणों ने प्रकृति देवता से अच्छी बारिश, भरपूर खेती, गांव की सुख-समृद्धि, जंगली जानवरों से सुरक्षा और सभी लोगों के निरोग रहने की कामना की. पूजा के दौरान पूरे वातावरण में श्रद्धा और आस्था का भाव देखने को मिला.
पूजा के बाद बरसे बादल
ग्रामीणों का कहना है कि पूजा समाप्त होने के कुछ ही समय बाद आसमान में घने बादल छा गए और तेज बारिश शुरू हो गई. देखते ही देखते मूसलाधार वर्षा ने पूरे इलाके को भिगो दिया. खेत, खलिहान और जलस्रोत पानी से भर गए. लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों ने इसे शुभ संकेत माना. कई ग्रामीणों ने इसे अपनी परंपरा और प्रकृति के प्रति आस्था का परिणाम बताया.
किसानों में लौटी उम्मीद
बारिश होने से किसानों ने राहत की सांस ली है. उनका कहना है कि अब धान समेत खरीफ फसलों की बुवाई और रोपाई में तेजी आएगी. पर्याप्त पानी मिलने से खेती की संभावनाएं बेहतर होंगी और फसल उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है. ग्रामीणों का मानना है कि समय पर हुई यह बारिश पूरे क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगी.
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प्रकृति और परंपरा का अनोखा संगम
देवसोल गांव में आयोजित यह सामूहिक पहाड़ पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और सामुदायिक एकता का भी प्रतीक है. आधुनिक दौर में भी ऐसी परंपराएं ग्रामीण समाज की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखे हुए हैं. बारिश के बाद गांव में उत्साह का माहौल है और किसान अब बेहतर कृषि सीजन की उम्मीद के साथ खेतों की तैयारियों में जुट गए हैं.
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