डुमरिया.
डुमरिया प्रखंड में इस बार धान की अच्छी पैदावार हुई है. किसानों के चेहरे पर चमक है. लगातार रुक-रुक कर हुई बारिश ने धान की खेती में संजीवनी का काम किया. हालांकि, अधिक बारिश के कारण कई तरह की बीमारियों ने किसानों को परेशान किया. जहां बीमारी लगी धान के पौधे को सूखा डाला. इस तरह कि बीमारी डुमरिया प्रखंड में पहले नहीं देखा गया था. राहत की बात है कि कुछ जगहों में यह बीमारी देखी गयी. डुमरिया प्रखंड की हर पंचायतों में धान की बंपर खेती हुई है. धान की कटाई शुरू हो गयी है. किसान कहीं मशीन से तो, कहीं हाथ से कटाई कर रहे हैं. किसानों के समक्ष धान बेचने की चिंता है. डुमरिया प्रखंड के छोटे किसानों को धान का उचित मूल्य नहीं मिलता रहा है.लैंपसों की सही व्यवस्था नहीं होने के कारण किसान धान 13 से 14 रुपये प्रति किलो की दर से बेचने के लिए विवश हैं. धान बिक्री के लिए नियम जटिल व पेचीदा होने के कारण छोटे छोटे किसान लैंपस का द्वार पर नहीं पहुंचते है. लैंपस में नियम के अनुसार, 48 घंटे में धान की पहली किस्त किसान के खाते में भेजने का प्रावधान है. डुमरिया प्रखंड के तमाम लैंपस के किसानों को रुपये मिलने में कई माह लग जाते हैं. इस कारण किसान लैंपस में धान बेचना छोड़ देते हैं. बाजार में व्यापारी को बेचते हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
