घाटशिला. घाटशिला प्रखंड की कालचिती पंचायत स्थित बुरुडीह में रामचंद्रपुर शीतल दोहा नाला से सिंचाई के खेत तक पानी पहुंचाने के लिए मंगलवार को आधा दर्जन गांवों के किसानों ने नाली सफाई अभियान शुरू किया. इसका नेतृत्व जितेन महतो ने किया. बीते मानसून में तेज बारिश से लगभग तीन किमी लंबी कच्ची नाली कई जगह क्षतिग्रस्त हो गयी थी. इससे खेतों तक पानी पहुंचाना मुश्किल हो गया था. इसे देखते हुए आस-पास के सभी गांवों के किसान श्रमदान कर नाली की सफाई में जुटे हैं.
कई जगहों पर जेसीबी की मदद ली गयी:
जितेन महतो ने बताया कि शीतल दोहा नाला के कुछ हिस्सों में हालात इतने खराब थे, कि सफाई के लिए जेसीबी मशीन का सहारा लेना पड़ा. इस क्षेत्र के रामचंद्रपुर, हीरागंज, कालचिती, पूर्णापानी, बांधडीह और महालीडीह गांवों के किसान इसी नाले पर निर्भर हैं. करीब 200 एकड़ भूमि में गरमा धान व सब्जी की खेती करते हैं. खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए यह नाली जीवनरेखा साबित होती है.करीब चार किमी लंबी नाली के सहारे खेती:
बुद्धेश्वर महतो ने बताया कि बुरुडीह-रामचंद्रपुर स्थित शीतल दोहा नाला से बाधडीह और पूर्णापानी गांव तक करीब चार किमी तक कच्ची नाली बनाकर पानी ले जाया जाता है. बीते कई वर्षों से किसान इसी अस्थायी व्यवस्था के सहारे खेती कर रहे हैं.किसान दो दशक से पक्की नाली का निर्माण कर रहे:
किसानों ने कहा कि हम पिछले दो दशक से पक्की नाली निर्माण की मांग कर रहे हैं. इस संबंध में स्थानीय सांसद, विधायक और जनप्रतिनिधियों को कई बार लिखित ज्ञापन सौंपा गया. विभागीय पदाधिकारियों ने कई बार नाली का निरीक्षण किया, लेकिन लाभ नहीं हुआ.हर साल समस्याओं से जूझते हैं ग्रामीण :
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बरसात के बाद आधा दर्जन गांवों के किसान श्रमदान से लगभग तीन किमी लंबी नाली की सफाई करते हैं, ताकि खेती हो सके. बावजूद इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है. सफाई अभियान में दीपक नामाता, गुरचरण सिंह, रघुनंदन सिंह, गणिलाल भुईया, नवीन चालक सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे. किसानों ने एक बार फिर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि शीतल दोहा नाला को पक्का कराया जाय, ताकि उन्हें हर साल श्रमदान के सहारे सिंचाई की समस्या से जूझना न पड़े.
किसानों की समस्याएं
– दो दशक से शीतल दोहा नाली को पक्का कराने की मांग कर रहे– हर साल आधा दर्जन गांवों के किसान श्रमदान से नाली की सफाई करते हैं
– कच्ची नाली हर साल क्षतिग्रस्त होती है, सिंचाई व्यवस्था होती है प्रभावित– सांसद और विधायकों को कई बार लिखित ज्ञापन सौंपा, लेकिन समाधान नहीं
– विभागीय पदाधिकारियों ने कई बार निरीक्षण किया, लेकिन समाधान नहीं हुआ– सभी प्रयासों के बाद भी स्थिति जस की तस, किसान हर साल होते हैं परेशान
