East Singhbhum News : तीन कमरों में आठवीं तक पढ़ाई बरामदे में पढ़ रहे बच्चे, परेशानी

चाकुलिया. मधुपुर स्कूल में कमरों की कमी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित

चाकुलिया. चाकुलिया प्रखंड की बर्डीकानपुर-कलापाथर पंचायत स्थित उमवि मधुपुर में कमरों की कमी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. पिछले कई वर्षों से मधुपुर स्कूल अपनी बेहतर शिक्षण व्यवस्था, प्रबंधन व प्राकृतिक सौंदर्य के कारण चर्चित रहा है. विद्यालय के प्रधानाचार्य सुनील कुमार बेरा को कई बार जिला व राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया जा चुका है. हाल में विद्यालय में कमरे का अभाव है. विद्यालय परिसर में तीन भवन है. इनमें से दो भवन जर्जर हो चुके हैं. बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य ने जर्जर भवनों में ताला बंद कर दिया है. तीन कमरे वाले भवन में पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक के बच्चों की पढ़ाई की जा रही है. बच्चों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है. विद्यालय में पहली से आठवीं कक्षा तक के 94 बच्चे हैं. शिक्षकों की संख्या तीन है.

सोलर जलमीनार खराब, कुआं बना सहारा:

प्रधानाचार्य सुनील कुमार बेरा ने बताया कि विद्यालय परिसर में मुख्यमंत्री जलापूर्ति योजना से सोलर जलमीनार लगी है. कुछ दिनों से सोलर जलमीनार के बिजली कनेक्शन में खराबी आ गयी है. इस कारण पानी नहीं निकल पा रहा है. बच्चों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है. स्कूल परिसर में स्थित कुएं का पानी सहारा बना है.

वर्ष 2012 में बनी चहारदीवारी, अब तक 1.25 लाख बकाया:

प्रधानाचार्य ने बताया कि वर्ष 2012 में शिक्षा विभाग ने विद्यालय की चहारदीवारी निर्माण का कार्य शुरू किया गया. निर्माण कार्य पूरा हो गया है. 75% राशि का भुगतान किया गया. आज भी लगभग 1 लाख 25 हजार रुपये का भुगतान नहीं किया गया है.

धालभूमगढ़ : एक कमरे में पढ़ रहे चार कक्षाओं के बच्चे

धालभूमगढ़ प्रखंड की कानास पंचायत स्थित रोमाशोली उमवि में कमरों की कमी है. इसके कारण चार कक्षाओं के बच्चों को एक कमरे में पढ़ाई करनी पड़ रही है. बच्चों की पढ़ाई सही ढंग से नहीं हो पाती है. विद्यालय की चहारदीवारी अधूरी रहने के कारण सुरक्षा की समस्या है. विद्यालय परिसर में बना एसीआर (गोल घर) जर्जर हालत में है. इसके कारण पठन-पाठन बंद है.

केजी से आठवीं तक होती है पढ़ाई :

प्रभारी प्रधानाध्यापिका दुली हांसदा ने बताया कि रोमाशोली उमवि में केजी से आठवीं तक पढ़ाई होती है. यहां कुल 146 बच्चे पढ़ते हैं. विद्यालय में मात्र चार कमरों में कक्षाएं चलती हैं. एक कमरे में चार कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाया जाता है. एक शिक्षिका ने चार कक्षाओं के बच्चों को एक साथ पढ़ाना काफी मुश्किल है.

छत से गिर रहा प्लास्टर, परेशानी:

स्कूल के गोलघर की छत से प्लास्टर झड़ रहा है. इसके कारण वहां कार्यालय व अन्य गतिविधियां बंद है. स्थिति ऐसी है कि प्रधानाध्यापिका को भी अपना कार्य किसी कक्षा में या बरामदे में करना पड़ता है.

स्कूल में चार शिक्षक, चहारदीवारी अधूरी :

विद्यालय में चार शिक्षक हैं. इनमें एक सरकारी व तीन पारा शिक्षक हैं. विद्यालय की चहारदीवारी लंबे समय से अधूरी है. यहां मतदान केंद्र (162) भी है. चापाकल में सोलर पंप लगाकर जलापूर्ति होती है. हैंडल खराब होने के कारण बरसात व बादल रहने पर सोलर पंप काम नहीं करता है. उन्होंने बेहतर ढंग से पठन-पाठन के लिए अविलंब दो कमरों की आवश्यकता बतायी है. उन्होंने बताया कि कोई अधिकारी या कर्मचारी विद्यालय आते हैं, तो उनसे क्लासरूम निर्माण की मांग की जाती है.

कुएं के पानी से दाल बनाते हैं ग्रामीण

मधुपुर उमवि परिसर में एक कुआं है. इसका पानी मीठा है. लोग अपने घरों में इसी कुएं के पानी का इस्तेमाल करते हैं. प्रधानाचार्य ने बताया कि कुएं के पानी से ही ग्रामीण दाल बनाते हैं. कुएं के पानी में दाल जल्द गल जाती है. ग्रामीणों की सुविधा को देखते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य ने चहारदीवारी निर्माण के दौरान कुआं तक ग्रामीणों की पहुंचने की व्यवस्था कर दी, ताकि विद्यालय बंद रहने पर लोगों को कुएं का पानी मिलता रहे.

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Author: ATUL PATHAK

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