डी-कार्बनाइजेशन मिशन लांच करेगा भारत, कार्बन उत्सर्जन पर लग सकता है टैक्स, जमशेदपुर में बोलीं सीएसआईआर प्रमुख

Decarbonization Mission India: डॉ एन कलैसेल्वी ने बताया कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए भारत सरकार नयी नीति लाने वाली है. कार्बन उत्सर्जन पर अलग से ड्यूटी और टैक्स भी लगाने पर विचार हो रहा है. उन्होंने बताया कि भारत सरकार नेशनल सीसीयूएस मिशन यानी कार्बन कैप्टर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज मिशन लांच कर रही है, ताकि भारत में कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके.

Decarbonization Mission India: भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च – सीएसआइआर) काम कर रहे हैं. 5 अहम जरूरतें- खाना, पानी, स्वास्थ्य, परिवहन और रोजगार पर अहम कदम उठाये जा रहे हैं. यह जानकारी सीएसआइआर की महानिदेशक (डायरेक्टर जेनरल) डॉ एन कलैसेल्वी ने दी. डॉ एन कलैसेल्वी डीएसआइआर की सचिव भी हैं. उन्होंने जमशेदपुर में पत्रकारों से कहा कि सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग के लिए डायग्नॉस्टिक किट विकसित हो चका है. 25 लाख मरीजों पर ब्लड के एक से टेस्टिंग की जा चुकी है.

विदेशों में सिकल सेल एनीमिया के इलाज पर खर्च 25 करोड़, भारत में 1 करोड़

उन्होंने कहा कि सिकल सेल एनीमिया के उपचार की दवा भी बनायी गयी है, जो हाइड्रोक्साइड पर आधारित है. इससे बच्चों का भी इलाज किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि 15 नवंबर को सिकल सेल रोग के लिए भारत की पहली स्वदेशी सीआरआइएसपीआर आधारित जीन थेरेपी शुरू कर दी गयी है. उन्होंने बताया कि सीएसआइआर-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आइजीआइबी) ने उपचार लागत को काफी कम कर दिया है. विदेशों में 20 से 25 करोड़ रुपए उपचार पर खर्च होते हैं. भारत में अब यह एक करोड़ रुपए में संभव है. कोशिश है कि 50 लाख और फिर 25 लाख रुपए की लागत में इसका इलाज भारत में किया जा सके.

Decarbonization Mission India: पैरासिटामोल का प्रोडक्शन करने वाला नंबर-2 देश बन जायेगा भारत

सीएसआइआर की महानिदेशक ने बताया कि दुनिया में पैरासिटामोल का प्रोडक्शन कई जगहों पर होता है. भारत में इसकी खपत काफी ज्यादा है. भारत में 37 हजार टन पैरासिटामोल की खपत होती है. इसके लिए भारत में ही तकनीक विकसित की गयी है. कर्नाटक की कंपनी सत्य दीप्था फार्मास्यूटिकल लिमिटेड काम कर रही है. इसके बाद स्वदेशी पैरासिटामोल मिलने लगेगा और हम इसका उत्पादन करने वाले दुनिया का दूसरा देश बन जायेंगे.

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कार्बन उत्सर्जन पर ड्यूटी लगेगी – डॉ एन कलैसेल्वी

सीएसआइआर की महानिदेशक डॉ एन कलैसेल्वी ने बताया कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए भारत सरकार नयी नीति लाने वाली है. कार्बन उत्सर्जन पर अलग से ड्यूटी और टैक्स भी लगाने पर विचार हो रहा है. उन्होंने बताया कि भारत सरकार नेशनल सीसीयूएस मिशन यानी कार्बन कैप्टर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज मिशन लांच कर रही है, ताकि भारत में कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके. यहां का पर्यावरण बेहतर बने. कैबिनेट को इसका प्रस्ताव भेजा गया है.

एनएमएल जमशेदपुर के प्लेटिनम जुबिली समारोह में शामिल कर्मचारी, अधिकारी और अतिथिगण. फोटो : बीके गोस्वामी

हवा में ही कार्बन कैप्चर करने और री-यूज करने की है योजना

इसके तहत प्लान किया गया है कि कार्बन को पहले हवा या इंडस्ट्रियल वेस्ट से ही कैप्चर कर लिया जाये. इसके बाद इसका स्टोरेज हो और इसका फिर से इस्तेमाल हो सके. इस दिशा में काम चल रहा है. रेयर मेटल को लेकर भी भारत सरकार एनएमएल जैसी संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रही है. इसमें सफलता भी मिल रही है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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