चाकुलिया.
चाकुलिया में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन बुधवार को कथा व्यास आरती किशोरी ने सुदामा चरित्र, भगवान श्रीकृष्ण का गोलकधाम गमन और राजा परीक्षित मोक्ष का प्रसंग सुनाया. उन्होंने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति को भक्ति और ज्ञान की प्राप्ति होती है. वह जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्त होकर परम लक्ष्य की ओर अग्रसर होता है. उन्होंने बताया कि जब राजा परीक्षित को ऋषि के श्राप के कारण तक्षक नाग से डसे जाने का वरदान मिला, तो उन्होंने अपना राजपाट पुत्र को सौंप दिया. गंगा तट पर जाकर शुकदेव जी की शरण ली. सात दिनों तक शुकदेव जी के मुख से भागवत कथा के श्रवण से उनका भय और आसक्ति मिट गयी. अंततः तक्षक नाग के विष से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई. कथा व्यास ने श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब सुदामा द्वारका पहुंचे, तो भगवान कृष्ण अपने सखा के स्वागत में भावविह्वल होकर दौड़ पड़े, उन्हें गले लगाया और अपने सिंहासन पर बैठाया. उन्होंने सुदामा को अपनी अपार संपत्ति से अधिक प्रेम और मित्रता का उपहार दिया. मौके पर स्थानीय बाल कलाकारों ने श्रीकृष्ण-सुदामा की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की. इस दौरान कथा व्यास ने अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, दर पे सुदामा गरीब आ गया है.., मिलन सात दिन का हमारा तुम्हारा… आदि भजनों से श्रोताओं की आंखें नम कर दीं. मौके पर पतित पावन दास, दिलीप कुमार दास (लिली), रंजीत दास (छोटा), लक्ष्मी नारायण दास, गिरधारी महतो, पशुपति बेरा, देवदास पांडा, तारकनाथ दास (भोला), अजय रुंगटा, आरती देवी, शारदा देवी उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
