घाटशिला के जंगलों में बिछा जलस्रोतों का जाल, हाथियों व वन्यजीवों को राहत

भीषण गर्मी में बेअसर हुआ जलसंकट

घाटशिला.

घाटशिला वन क्षेत्र में इस वर्ष भीषण गर्मी के बावजूद वन्य प्राणियों, विशेषकर हाथियों के कुनबे को पानी के संकट से नहीं जूझना पड़ रहा है. पूर्व में पानी के अभाव और आपसी संघर्ष में कई हाथी शावकों (बच्चों) की मौत के बाद प्रशासन ने पहल की. क्षेत्र में जलस्रोतों का जाल बिछा दिया है. वन विभाग, भूमि संरक्षण विभाग और लघु सिंचाई विभाग की ओर से पहाड़ की तलहटी में बनाये गये तालाबों और चेकडैमों में इस समय भी पर्याप्त पानी है. यही कारण है कि हाथियों का एक विशाल झुंड अपने बच्चों के साथ पिछले डेढ़ महीने से इसी वन क्षेत्र में डेरा डाले हुए है. जंगलों को छोड़कर मानवीय आबादी की ओर नहीं जा रहा है.

रिकॉर्ड बारिश और जनप्रतिनिधियों की पहल का दिखा असर

जानकारों के अनुसार, वर्ष 2025 में घाटशिला और आस-पास के क्षेत्रों में लगभग 2100 से 2200 मिमी रिकॉर्ड बारिश हुई थी, जिससे जलस्रोतों का वाटर लेवल मजबूत है. इसके अलावा वर्ष 2019 से 2025 के बीच गर्मी में पानी की कमी से हुई हाथी शावकों की मौतों के बाद सांसद विद्युत वरण महतो व पूर्व मंत्री रामदास सोरेन ने पहाड़ी क्षेत्रों में जल संकट दूर करने के लिए विशेष पहल की थी.

ऐसे बढ़ाये गये जलस्रोत

युक्तिडीह व चेकाम :

लघु सिंचाई विभाग ने युक्तिडीह में पहाड़ के नीचे नये तालाब का निर्माण और चेकाम में पुराने चेकडैम का जीर्णोद्धार किया.

पुनगोड़ा व दीघा :

भूमि संरक्षण विभाग की ओर से पुनगोड़ा पहाड़ के निकट तालाब और वन विभाग ने दीघा क्षेत्र में नये चेकडैम का निर्माण कराया है.

डायनमारी :

यहां झरना के नीचे नये चेकडैम और तालाब का निर्माण कार्य वर्तमान में भी जारी है.

सुरक्षित हैं फसलें, बुरुडीह डैम के पास विचरण कर रहे हाथी

क्षेत्र के बुरुडीह डैम, धरागिरी, बासाडेरा, उसराघाटी, डायनमारी, बांदरचुआ, टिकरी, पूरनाजोल झरना और पानझरना में पानी की प्रचुरता के कारण हाथी जंगलों में सीमित हैं. बुरुडीह के आस-पास के किसानों ने सीजन में धान की रोपनी की है, लेकिन जंगलों में ही पानी और चारा मिल जाने के कारण हाथियों ने फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाया है. वे सिर्फ जलस्रोतों के इर्द-गिर्द ही भ्रमण कर रहे हैं, जिससे हाथी-मानव द्वंद्व की घटनाओं में कमी आयी है.

घाटशिला वन क्षेत्र में पानी की कमी व आपसी संघर्ष में मारे गये हाथी

फरवरी 2024 :

माकुली जंगल में दो नर हाथियों की आपसी भिड़ंत में एक 10 वर्षीय हाथी की मौत हो गयी थी.

वर्ष 2025 :

गुड़ाझोर के निकट ठंड में एक बेहोश हाथी शावक का रेस्क्यू किया गया था, जिसने बाद में दम तोड़ दिया.

वर्ष 2019-20 :

बासाडेरा, हीरागंज (लालमटिया) और झाटीझरना क्षेत्र में तीन मासूम हाथी शावकों की पानी की कमी व अन्य कारणों से मौत हुई थी.

वर्ष 2016 :

चेकाम और राजाबासा (गालूडीह) के पास गड्ढे में गिरने से हाथी के बच्चे की मौत हुई थी.

वर्ष 2009-10 :

सुकलाड़ा जंगल में दो दिनों तक चले संघर्ष में एक नर हाथी मारा गया था.

…क्या कहते हैं पंचायत प्रतिनिधि…

कई वर्ष पहले चेकाम पहाड़ पर गर्मी में पानी की कमी से हाथी के बच्चे की मौत हुई थी. इसके बाद जनप्रतिनिधियों की पहल से युक्तिडीह, चेकाम और पुनगोड़ा में बने जलस्रोतों में अब सालों भर पानी रहता है. इसका परिणाम है कि इस भीषण गर्मी में भी हाथी सुरक्षित हैं.

– श्यामचंद मानकी, मुखिया, भादुआ पंचायत

वर्ष 2025 में अच्छी बारिश होने से झरनों और चेकडैमों में पानी उपलब्ध है. नेत्रा झरना, बासाडेरा और डायनमारी के आस-पास वन व भूमि संरक्षण विभाग द्वारा बनाए गए जलाशयों के कारण इस बार जंगलों में जल संकट नहीं है.

– बैद्यनाथ मुर्मू, मुखिया, कालचिती पंचायतB

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लेखक के बारे में

Author: ATUL PATHAK

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