चांडिल डैम से नहरों में छोड़ा गया पानी, धान रोपनी में जुटे किसान

चांडिल डैम से नहरों में पानी छोड़े जाने के बाद गालूडीह और आसपास के क्षेत्रों में धान की रोपनी तेज हो गई है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खास सलाह दी है।

संवाददाता, गालूडीह

बाघुड़िया पंचायत सहित गालूडीह के ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश के साथ-साथ सिंचाई नहरों में पानी छोड़े जाने से किसानों को बड़ी राहत मिली है. नहर का पानी खेतों तक पहुंचने के बाद क्षेत्र में धान रोपनी का काम युद्धस्तर पर तेज हो गया है. पिछले कुछ दिनों से पानी की कमी के कारण जिन किसानों की रोपनी रुकी या प्रभावित हो रही थी, वे अब पूरे उत्साह के साथ खेतों में उतर गये हैं. गालूडीह के ग्रामीण इलाकों में सुबह से शाम तक खेतों में किसानों और मजदूरों की भारी चहल-पहल देखी जा रही है. महिलाएं जहां धान की रोपनी में जुटी हैं, वहीं किसान खेतों की तैयारी और सिंचाई व्यवस्था को संभाल रहे हैं.

बहरागोड़ा तक खेतों में लौटी रौनकसिंचाई विभाग द्वारा चांडिल डैम से पानी छोड़े जाने के बाद दायीं और मुख्य बायीं नहरें पूरी तरह भर गयी हैं. बंगाल सीमा से सटे एमजीएम, गालूडीह, घाटशिला, धालभूमगढ़, चाकुलिया और बहरागोड़ा तक की मुख्य बायीं नहर समेत सभी शाखा नहरों में पानी छोड़ दिया गया है. नहर का पानी मिलने से खेतों में पर्याप्त नमी बनी हुई है, जिससे रोपनी कार्य सुगमता से हो रहा है. किसानों का कहना है कि समय पर नहर में पानी आने से धान की खेती को नई उम्मीद मिली है.

समय पर रोपनी से पैदावार होगी अच्छी

कृषि विशेषज्ञक्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, दारीसाई के कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि समय पर धान की रोपनी होने से फसल की पैदावार अच्छी होती है और उत्पादन बढ़ने की पूरी संभावना रहती है. कृषि विशेषज्ञों ने इस अनुकूल समय का लाभ उठाने के साथ-साथ किसानों को खेतों में संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने तथा जल संचय की समुचित व्यवस्था बनाए रखने की महत्वपूर्ण सलाह दी है.


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By Mdparwez

मो. युनूस परवेज वर्ष 1995 से पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्होंने घाटशिला महाविद्यालय और रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और राजनीतिक विज्ञान ऑनर्स की डिग्री हासिल की है. इनकी राजनीति, अपराध, नक्सलवाद, खेल, शिक्षा और खेती किसानी की खबरों में विशेष रुचि है. डिजिटल जर्नलिज्म में 5 साल का अनुभव है.

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