East Singhbhum News : चाकुलिया में 81% रोपनी, 10 दिनों में 100 फीसदी संभव

जी-तोड़ मेहनत कर खेती कार्य में जुटे हुए हैं

चाकुलिया. वर्ष 2025 खरीफ की खेती के लिए काफी अच्छा माना जा रहा है. इस वर्ष मार्च से अबतक हुई बारिश ने धान की खेती में जान फूंक दी है. जून और जुलाई में मूसलाधार बारिश के बाद अगस्त में रुक-रुककर हो रही बारिश से किसानों को काफी राहत मिली है. किसान खेतों को तैयार कर युद्ध स्तर पर रोपनी के काम में जुटे हैं. अच्छी बारिश और किसानों की मेहनत का परिणाम है कि चाकुलिया प्रखंड में 81% धान की रोपाई पूरी हो चुकी है. अगले 10 दिनों में 100% होने की उम्मीद जतायी जा रही है. इसकी जानकारी प्रखंड कृषि पदाधिकारी शिवानंद घटवारी ने दी.

धान के लिए अगले कुछ दिनों में धूप और बारिश जरूरी :

प्रखंड कृषि पदाधिकारी ने कहा कि अगले कुछ दिनों तक धान की फसल के लिए बीच में बारिश और कड़ी धूप दोनों आवश्यक है. इससे फसल में कीड़े नहीं लगेंगे. चाकुलिया क्षेत्र लगभग 15 हजार 873 हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है. शत प्रतिशत आच्छादन का लक्ष्य मिला था. 81% आच्छादन हो चुका है. इस वर्ष अच्छी फसल की उम्मीद भी जतायी जा रही है.

इस वर्ष जून माह में सर्वाधिक 562 मिमी बारिश:

इस वर्ष मार्च से अच्छी बारिश शुरू हो गयी. मार्च में 25.4 मिमी बारिश हुई, जबकि अप्रैल माह में 99 मिमी, मई में 164.8 मिमी, जून में 562 मिमी, जुलाई में 365.8 मिमी व अगस्त में अब तक 187.8 मिमी बारिश हो चुकी है. जून माह में सर्वाधिक बारिश हुई है.

सरकारी दर पर खाद नहीं मिलने से किसान परेशान

चाकुलिया के किसानों को सरकारी दर पर धान का बीज समय पर प्राप्त हो गया था. चाकुलिया लैंपस के सचिव अरुण राय ने बताया कि इस वर्ष 535 क्विंटल धान बीज मिला था. प्रखंड के सभी लैंपसों को वितरण के लिए दिया गया था. इस वर्ष अब तक सरकारी दर पर खाद नहीं मिली है. इस कारण किसानों को ऊंची कीमतों पर दुकान से खाद खरीदनी पड़ रही है. चाकुलिया लैंपस भवन जर्जर होने के कारण खाद नहीं आयी. जर्जर भवन की सूचना विभाग को है.

घाटशिला प्रखंड में 70 प्रतिशत हुई रोपनी

घाटशिला प्रखंड में इस वर्ष अबतक लगभग 70 प्रतिशत रोपनी हो चुकी है. प्रखंड कृषि प्रभारी अमरनाथ पांडे ने बताया कि खरीफ मौसम में प्रखंड में करीब 10,400 हेक्टेयर सिंचित भूमि पर धान की खेती की संभावना रहती है. इस बार अधिक वर्षा होने के कारण लगभग 7, 280 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपनी हो पायी है. अत्यधिक बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति से किसानों को दिक्कत झेलनी पड़ी है. इसके बावजूद किसानों ने मेहनत कर धान की रोपनी पूरी की. 15 अगस्त के बाद धान रोपनी का कार्य बंद हो गया है. ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार वर्षा से खेतों में अधिक मात्रा में घास उग गयी है, जिसे किसान निकालने में लगे हुए हैं. कई जगहों पर धान की फसल में कीड़े-मकोड़े लगने की शिकायत मिली है. इसके नियंत्रण के लिए किसानों की ओर से दवा छिड़काव किया जा रहा है. हालांकि, इस बार खेतों में पानी रहने से बेहतर उत्पादन की उम्मीद है.

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Author: ATUL PATHAK

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