East Singhbhum News : चाकुलिया गौशाला में बनी सामग्री से देश भर में होगा होलिका दहन

महानगरों से आये एडवांस ऑर्डर पूरे करने में जुटे मजदूर

चाकुलिया. इस वर्ष होली के अवसर पर चाकुलिया गौशाला की विशेष पहचान देश के बड़े महानगरों में चमकने वाली है. गौशाला में तैयार की जा रही शुद्ध और पारंपरिक होलिका दहन सामग्री की मांग कोलकाता, हैदराबाद, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों से बड़े पैमाने पर आयी है. हिंदू धर्म में फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन का विशेष महत्व है. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इसी धार्मिक आस्था को देखते हुए चाकुलिया गौशाला में पिछले एक महीने से एक दर्जन मजदूर दिन-रात सामग्री तैयार करने में जुटे हैं. यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ धार्मिक मान्यताओं को भी मजबूती दे रही है.

गोबर से बनीं अनोखी कलाकृतियां:

गौशाला कर्मी सागर धल ने बताया कि इस वर्ष करीब 1500 पैकेट तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. इन पैकेटों में गाय के गोबर से निर्मित बेहद सुंदर और पारंपरिक प्रारूप शामिल हैं.

कलाकृतियां:

होला, होलिका, खड़ाऊं, नारियल, चांद-तारा, पान और पीपल के पत्ते.

पारंपरिक प्रारूप:

कड़ाही, चौकी, बेलन, ढाल, बड़कुल्ला और बरफी.

संपूर्ण किट:

पूजा के लिए आवश्यक सूता, हल्दी और अन्य पूजन सामग्री को मिलाकर एक ही पैकेट में पैक किया गया है.

300 रुपये में किट

गौशाला में बनी इस सामग्री की मांग टाटानगर और रांची के अलावा देशभर के बड़े शहरों से है. अधिकांश शहरों से एडवांस ऑर्डर प्राप्त हो चुके हैं. प्रत्येक पैकेट की कीमत 300 रुपये निर्धारित की गयी है, जो शुद्धता और मेहनत के लिहाज से बेहद वाजिब है.

आत्मनिर्भरता की नयी इबारत

चाकुलिया गौशाला केवल दुग्ध और सब्जी उत्पादन तक सीमित नहीं है. दीपावली में गोबर के दीपक बनाने के बाद अब होली के लिए इको-फ्रेंडली सामग्री तैयार कर स्वरोजगार की दिशा में मिसाल पेश कर रहा है. यह प्रयास न केवल पर्यावरण को बचा रहा, बल्कि आत्मनिर्भरता को नयी ऊंचाई दे रहा है.

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By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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