दुमका की दीदियां बनेंगी कारोबार की महारथी, 150 महिला उद्यमियों को मिलेगा 10 लाख तक की मदद

झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए 'झारखंड इनक्यूबेटर कार्यक्रम' शुरू किया गया है. यह कार्यक्रम 150 महिला उद्यमियों को गैर-कृषि क्षेत्र में सशक्त बनाएगा, उनके कारोबार का विस्तार करेगा और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएगा. चयनित महिलाओं को 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता और व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलेगा.

दुमका : झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली स्वयं सहायता समूह की दीदियों के हुनर को अब संस्थागत पंख लगने जा रहे हैं. जिले की महिला उद्यमियों को गैर-कृषि क्षेत्र में सशक्त बनाने, उनके कारोबार का विस्तार करने और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से ‘झारखंड इनक्यूबेटर कार्यक्रम’ का सघन अभियान शुरू किया गया है. भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) द्वारा अनुमोदित इस परियोजना को झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के समन्वय से IIM कलकत्ता इनोवेशन पार्क द्वारा धरातल पर उतारा जा रहा है.

कार्यक्रम में उपस्थित एसएचजी ग्रुप की दीदियां व अन्य. | Prabhat Khabar Network

150 महिला उद्यमियों का होगा चयन

इस पहल के तहत जिले भर से मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर में सक्रिय 150 श्रेष्ठ उद्यमियों का चयन किया जाएगा. चयनित उद्यमियों को पेशेवर मार्गदर्शन के साथ पात्रतानुसार 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता अनुदान अथवा ब्याज-मुक्त ऋण के रूप में मुहैया कराई जाएगी.

विधायक डॉ लुईस मरांडी, साथ में जिप अध्यक्ष जॉयस बेसरा व अन्य.| Prabhat Khabar Network

ग्रामीण हुनर में छिपी उद्यमिता की ताकत

कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के दौरान आयोजित विशेष सत्र को संबोधित करते हुए जामा विधानसभा क्षेत्र की विधायक डॉ लुईस मरांडी ने कहा कि गांव-कस्बों की महिलाओं के पास पारंपरिक ज्ञान और हुनर की कोई कमी नहीं है. स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी दीदियां सीमित संसाधनों में भी डोकरा कला जैसी समृद्ध विधाओं को जीवित रखे हुए हैं. जरूरत उन्हें आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप तकनीक, पैकेजिंग और प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने की है.

उन्होंने कहा कि झारखंड इनक्यूबेटर कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को केवल उत्पादक नहीं, बल्कि सफल कारोबारी बनाने का अवसर प्रदान करेगा.

वहीं, जिला परिषद अध्यक्ष जोयस बेसरा ने कहा कि दुमका की माटी की शिल्पकला को ‘पलाश’ ब्रांड के तहत जोड़ना महिला सशक्तिकरण का प्रभावी मॉडल है. महिलाओं के हाथ में सीधे बाजार से आने वाला मुनाफा पहुंचने से ग्रामीण समाज आर्थिक रूप से सबल होगा.

डोकरा कला के स्टॉल बने आकर्षण

जिले की महिला शिल्पकारों द्वारा तैयार डोकरा कलाकृतियों, पारंपरिक आभूषणों, देवी-देवताओं की प्रतिमाओं और होम डेकोर उत्पादों को पलाश ब्रांड के तहत स्टॉल लगाकर प्रदर्शित किया गया. पलाश ब्रांडिंग से स्थानीय शिल्पकारों को बिचौलियों से मुक्ति और उनके उत्पादों का वाजिब मूल्य सीधे खातों में मिलने की बात कही गई.

IIM कलकत्ता इनोवेशन पार्क के प्रतिनिधि आलोक रंजन और JSLPS के डीपीएम निशांत ने बताया कि जिले के सभी प्रखंडों में सखी मंडलों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. इच्छुक और पात्र महिला उद्यमी 30 सितंबर तक आधिकारिक पोर्टल nipjharkhand.iimcip.net पर ऑनलाइन पंजीकरण करा सकती हैं. JSLPS की प्रखंड स्तरीय टीमें तकनीकी आवेदन भरने में दीदियों को सहयोग कर रही हैं.

उद्यमियों को मिलेंगे कई लाभ

  • निर्माण एवं सेवा क्षेत्र में काम कर रही 150 महिला उद्यमियों का चयन किया जाएगा.
  • कारोबार बढ़ाने के लिए अनुदान या ब्याज-मुक्त ऋण के रूप में 10 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी.
  • IIM कलकत्ता इनोवेशन पार्क के विशेषज्ञ ब्रांडिंग, पैकेजिंग, क्वालिटी कंट्रोल और बिजनेस रणनीति का प्रशिक्षण देंगे.
  • मार्केट लिंकेज और डिजिटल नेटवर्क के तहत ई-कॉमर्स, कॉर्पोरेट गिफ्टिंग और बड़े रिटेल चेन से सीधे संपर्क स्थापित कराया जाएगा.
  • वित्तीय संस्थानों से आसान ऋण और सरकारी सब्सिडी योजनाओं का लाभ दिलाने की दिशा में सहायता की जाएगी.

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By Anand Jayswal

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