SKMU में बड़ा अपडेट, सेमेस्टर-6 के बाद छात्रों के सामने होंगे तीन विकल्प

SKMU में NEP नोडल अधिकारियों की बैठक में सेमेस्टर-6 के बाद विद्यार्थियों के तीन विकल्पों की जानकारी दी गयी. सेमेस्टर-7 के लिए 75% अंक जरूरी नहीं.

संवाददाता, दुमका: सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में सोमवार को सभी अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों के NEP नोडल ऑफिसरों की बैठक हुई. बैठक में यूजी सेमेस्टर-6 के बाद विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई और एग्जिट से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी गयी.

एनईपी कोऑर्डिनेटर डॉ. दीपक कुमार दास ने स्पष्ट किया कि यूजी सेमेस्टर-6 पास या प्रमोटेड सभी विद्यार्थी सेमेस्टर-7 में आगे की पढ़ाई कर सकते हैं. इसके लिए 75 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता नहीं है.

बैठक में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अब्दुस सत्तार, डायरेक्टर स्टूडेंट अफेयर्स डॉ. पूनम हेम्ब्रम, एनईपी कोऑर्डिनेटर डॉ. दीपक कुमार दास सहित सभी अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों के एनईपी नोडल ऑफिसर उपस्थित थे.

सेमेस्टर-6 के बाद विद्यार्थियों के सामने तीन विकल्प

एनईपी कोऑर्डिनेटर डॉ. दीपक कुमार दास ने बताया कि सेमेस्टर-6 के बाद विद्यार्थियों के सामने तीन विकल्प होंगे. विद्यार्थी अपनी आगे की पढ़ाई के अनुसार इन विकल्पों का चयन कर सकेंगे.

पहला विकल्प: UG डिग्री लेकर एग्जिट

पहले विकल्प के तहत विद्यार्थी सेमेस्टर-6 के बाद एग्जिट कर सकते हैं. एग्जिट करने वाले विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की ओर से यूजी डिग्री दी जायेगी. हालांकि, इस स्थिति में उन्हें यूजी ऑनर्स की डिग्री नहीं मिलेगी.

दूसरा विकल्प: चौथे वर्ष की पढ़ाई जारी

दूसरे विकल्प के तहत विद्यार्थी यूजी ऑनर्स के लिए चौथे वर्ष की पढ़ाई जारी रख सकते हैं. सेमेस्टर-6 पास या प्रमोटेड विद्यार्थी सेमेस्टर-7 में नामांकन लेकर आगे की पढ़ाई कर सकेंगे.

खास बात यह है कि सेमेस्टर-7 में आगे की पढ़ाई के लिए 75 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता नहीं है.

तीसरा विकल्प: UG ऑनर्स विद रिसर्च

तीसरे विकल्प के तहत विद्यार्थी UG ऑनर्स विद रिसर्च की पढ़ाई कर सकते हैं. इसके लिए सेमेस्टर-6 तक 75 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा.

इस तरह विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक उपलब्धि और आगे की पढ़ाई के लक्ष्य के अनुसार विकल्प चुनने का अवसर मिलेगा.

एग्जिट से पहले विश्वविद्यालय को देनी होगी सूचना

बैठक में री-एंट्री के प्रावधान पर भी चर्चा हुई. डॉ. दीपक कुमार दास ने बताया कि यदि कोई विद्यार्थी कार्यक्रम से एग्जिट करता है और बाद में दोबारा पढ़ाई शुरू करना चाहता है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत री-एंट्री का प्रावधान है.

एग्जिट लेने से पहले विद्यार्थी को अपने महाविद्यालय के माध्यम से विश्वविद्यालय को इसकी सूचना देनी होगी.

उन्होंने सभी नोडल ऑफिसरों से कहा कि विद्यार्थियों को सेमेस्टर-6 के बाद उपलब्ध सभी विकल्पों की स्पष्ट जानकारी दी जाये, ताकि वे अपनी आगे की पढ़ाई को लेकर उचित निर्णय ले सकें. उन्होंने विद्यार्थियों को चौथे वर्ष की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही.

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कॉलेजों में विद्यार्थियों को दी जायेगी पूरी जानकारी

डायरेक्टर स्टूडेंट अफेयर्स डॉ. पूनम हेम्ब्रम ने विश्वविद्यालय की ओर से जारी एसओपी की जानकारी नोडल ऑफिसरों को दी. उन्होंने कहा कि सभी महाविद्यालयों को विश्वविद्यालय की ओर से जारी SOP का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा.

कुलसचिव डॉ. अब्दुस सत्तार ने सभी नोडल ऑफिसरों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के बीच NEP के तहत उपलब्ध विकल्पों की व्यापक जानकारी पहुंचायें.

विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की एसओपी, सरकार के एनईपी रेगुलेशन और यूजीसी के नियमों की जानकारी देने को कहा गया. साथ ही सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्धारित नियमों और एसओपी का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया.

बैठक में डीएसडब्ल्यू कार्यालय के कर्मी मनोज की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

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By Anand Jayswal

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