कोकुन बेचकर आत्मनिर्भर बने छह हजार किसान

रेशम उत्पादन की पहल. किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा पी-4 स्टेशन भंगाबांध

आदित्यनाथ पत्रलेख, बासुकिनाथ केंद्रीय तसर अनुसंधान व प्रशिक्षण संस्थान के पी-4 स्टेशन भंगाबांध रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है. किसान रेशम कीट की गोटी तैयार कर और उसे बेचकर न केवल अच्छी आमदनी कर रहे हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भी बन रहे हैं. पी-4 स्टेशन के सहयोग से तसर रेशम के गुणवत्तापूर्ण कोकुन (गोटी) का उत्पादन कर किसान लाभान्वित हो रहे हैं. यह स्टेशन उच्च गुणवत्ता वाले तसर बीज किसानों को प्रदान करता है, जिससे अच्छी क्वालिटी के रेशम का उत्पादन होता है. रेशम उत्पादन को लेकर राज्य में रांची व दुमका के जरमुंडी में कुल दो पी-4 स्टेशन बनाये गये हैं. 42 पीपीसी बनाये गये हैं. परियोजना सहायक प्रेमलाल ने बताया कि पी-4 स्टेशन में इस बार चार लाख कोकुन क्रय करने का लक्ष्य है. वर्तमान में तीन लाख कोकुन क्रय कर बीजागार में रखा गया है. यह केंद्र किसानों को प्रशिक्षण, बेहतर बीज, बाजार तक पहुंच तथा कोकुन की अच्छी कीमत देकर, बड़े पैमाने पर किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त कर रही है. कोकुन पालन ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आया है. यह रेशम उत्पादन का महत्वपूर्ण चरण है, जहां रेशम के कीड़ों से प्राप्त कोकुन को संसाधित किया जाता है. ताकि रेशम के धागे निकाले जा सकें. यह केंद्र किसानों को रेशमकीट पालन की आधुनिक तकनीक सिखाता है, जिससे फसल खराब होने का खतरा कम होता है और उपज बढ़ती है. आदिवासी ग्रामीण परिवार कोकुन पालन से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार कर रहे हैं. —— पी-4 स्टेशन से जुड़े हैं 42 गांवों के किसान पी-4 स्टेशन से 42 गांवों के करीब 6000 किसान लाभान्वित हो रहे हैं. किसान कोकुन बेचकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं. पी-4 स्टेशन के प्रोजेक्ट सहायक प्रेमलाल मांझी ने बताया कि रेशम उत्पादन बेहतर आजीविका का नया विकल्प है, जिससे वे अपनी आय बढ़ा सकते हैं. क्षेत्र के किसान कोकुन उत्पादन के माध्यम से अपनी किस्मत बदल रहे हैं. अच्छी आमदनी कमा रहे हैं. यहां रेशम उत्पादन की अच्छी संभावना है. 100 तितली का एक डीएफएल्स होता है, किसानों को कोकुन उत्पादन के लिए 600 रुपये प्रति 200 ग्राम डीएफएल्स सरकारी दर पर उपलब्ध कराया जाता है. इसके बाद किसान गुणवत्तापूर्ण कोकुन को पी-4 स्टेशन में जमा करते हैं. इस एवज में उसे 5.75 रुपये प्रति गोटी दाम दिया जाता है. किसान करीब 10 से 12 हजार कोकुन उत्पादन करते हैं. तीन माह की देखरेख के बाद इसका उत्पादन हो जाता है. पी-4 स्टेशन किसानों को प्रशिक्षण और उन्नत बीज देकर रेशम उत्पादन में मदद करता है, जिससे वे कोकुन गोटी की खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं. लाभान्वित हो रहे हैं. आदिवासी ग्रामीण परिवार कोकुन पालन से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार कर रहे हैं. महादेवगढ़, मोहलबना, चंदुबथान, रक्सा, लुसिया, धोबानी गांवों के किसान रेशम के गोटी का उत्पादन करते हैं. छह बीजागार के माध्यम से बीज किया जाता है तैयार पी-4 स्टेशन के कीट पालक अमरदीप पासवान ने बताया कि बीजागार से रेशम कीट तैयार किया जाता है. ताकि रेशम उत्पादन को बढ़ावा मिल सके. किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले रेशम के लिए आवश्यक बीज मिले. इन बीजागारों में रेशम कीट के अंडे से लार्वा और फिर कोकुन बनाने की प्रक्रिया होती है. पी-4 स्टेशन से बीज किसानों को दिये जाते हैं. बीजागार में रेशम उत्पादन में आने वाली बीज संबंधी समस्याओं को हल किया जाता है. जरमुंडी के भंगाबांध में वर्ष 2011 में गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे की पहल पर पी-4 स्टेशन में छह बीजागार बनाये गये थे. इसमें तीन माह तक कोकुन की देखरेख के बाद रेशम का उत्पादन हो जाता है. अर्जुन के पेड़ में कोकून के कीट का पालन किया जाता है. किसान रेशम कीट पालन व कोकुन प्रसंस्करण कर आय में वृद्धि कर रहे हैं. देखरेख के अभाव में क्वार्टर हो रहा है जर्जर पी-4 स्टेशन भंगाबांध परिसर में बना कर्मचारी क्वार्टर देखरेख के अभाव में जर्जर हो रहा है. क्वार्टर के मेन गेट पर ही छोटे-छोटे खरपतवार घास ऊग आये है. कर्मचारियों ने बताया कि परिसर में पानी का अभाव है. पानी की कमी के कारण क्वार्टर का उपयोग नहीं हो पा रहा है. लाखों की लागत से बना भव्य क्वार्टर भवन बेकार पड़ा है. कर्मियों ने क्वार्टर में पेयजल सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग की है.

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Published by: Rakesh kumar

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