बासुकिनाथ : श्रावणी मेला के 24वें दिन शनिवार को बासुकिनाथ धाम में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला. भोर से ही मेला क्षेत्र कांवरियों की भीड़ से पट गया. शिवगंगा में स्नान के बाद श्रद्धालु कतारबद्ध होकर बाबा फौजदारीनाथ के दर्शन और जलार्पण के लिए पहुंचे. हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा मेला क्षेत्र शिवमय बना रहा. मंदिर प्रबंधन के अनुसार 1,24,324 कांवरियों ने बाबा फौजदारीनाथ पर जलार्पण किया.
लंबी कतार के बावजूद उत्साह कायम
पूर्वाह्न 2.05 बजे मंदिर का पट खोला गया और तीन बजे से श्रद्धालुओं ने गंगाजल अर्पित करना शुरू किया. श्रद्धालुओं की कतार संस्कार मंडप, फलाहारी धर्मशाला, शिवगंगा पीड़, कुशवाहा धर्मशाला और तारा मंदिर पॉइंट तक रही. अधिकारी और सुरक्षाकर्मी कांवरियों को व्यवस्थित तरीके से गर्भगृह तक पहुंचाते रहे.
26,500 श्रद्धालुओं ने काउंटर पर चढ़ाया जल
जलार्पण की वैकल्पिक व्यवस्था के तहत करीब 26,500 कांवरियों ने जलार्पण काउंटर पर गंगाजल अर्पित किया. श्रद्धालु एलसीडी स्क्रीन पर बाबा के शिवलिंग का दर्शन करते हुए काउंटर पर जल चढ़ाते रहे. यहां से गंगाजल पाइपलाइन के जरिए सीधे बाबा फौजदारीनाथ के शिवलिंग तक पहुंचता है.
3368 श्रद्धालुओं ने किया शीघ्रदर्शनम
शीघ्रदर्शनम व्यवस्था के तहत 3368 टोकन की बिक्री हुई. 500 रुपये का रसीद लेकर श्रद्धालुओं ने शीघ्रदर्शनम गेट से गर्भगृह में प्रवेश कर जलार्पण किया. इस व्यवस्था से मंदिर प्रबंधन को 18 लाख 84 हजार रुपये की आमदनी हुई.
मंदिर न्यास को 19.69 लाख की आमदनी
मंदिर न्यास पर्षद को विभिन्न स्रोतों से कुल 19,69,550 रुपये की आमदनी प्राप्त हुई. मंदिर दानपेटी से 35,500 रुपये और गर्भगृह गोलक से 50,050 रुपये नगद प्राप्त हुए. राशि की गिनती अधिकारियों की मौजूदगी में की गयी.
800 कैमरों से मेला क्षेत्र पर नजर
श्रावणी मेला को लेकर बासुकिनाथ, दर्शनियाटिकर और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर करीब 800 सीसीटीवी कैमरे लगाए गये हैं. इनके माध्यम से मेला क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है. आपात स्थिति से निपटने के लिए अधिकारी और कर्मी 24 घंटे तैनात हैं.
शिवगंगा में एनडीआरएफ की टीम मुस्तैद
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए शिवगंगा में एनडीआरएफ की टीम तैनात है. मोटर बोट के साथ जवान लगातार निगरानी कर रहे हैं. श्रद्धालु सुरक्षा व्यवस्था के बीच शिवगंगा में स्नान कर बाबा फौजदारीनाथ के दरबार की ओर बढ़ते रहे.
