दुमका : फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नये भवन में स्थानांतरण के बाद दुमका सदर अस्पताल की ओपीडी सेवा बंद किये जाने की कवायद पर सिविल सोसायटी ने एतराज जताया है. बुधवार को सिविल सोसायटी दुमका के प्रतिनिधिमंडल ने संताल परगना प्रमंडल के आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को पूर्व की तरह यथावत रखने की मांग की. प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सदर अस्पताल शहर के बीचोंबीच स्थित है और आम लोगों के लिए आसानी से पहुंच योग्य है. ऐसे में अस्पताल की ओपीडी बंद करना जनहित में उचित नहीं होगा.
नये भवन में हो रहा मेडिकल कॉलेज का स्थानांतरण
सिविल सोसायटी ने कहा कि झारखंड सरकार द्वारा सृजित फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल वर्तमान में सदर अस्पताल के भवन से संचालित हो रहा है. मेडिकल कॉलेज अस्पताल का करीब 500 बेड का नया भवन शहर से लगभग सात किलोमीटर दूर रिंग रोड में बनकर तैयार है. अब मेडिकल कॉलेज अस्पताल को नये भवन में स्थानांतरित किया जा रहा है. इसके बाद सदर अस्पताल की दैनिक ओपीडी बंद की जा रही है.
ओपीडी बंद करने के निर्णय पर सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त के समक्ष सवाल उठाया कि यदि सदर अस्पताल का मेडिकल कॉलेज अस्पताल के साथ विलय या समायोजन नहीं किया गया है, तो फिर सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को बंद करने का निर्णय किस आधार पर लिया जा रहा है. कहा कि सदर अस्पताल जिला मुख्यालय के मध्य में होने के कारण मरीजों के लिए सुविधाजनक है. खासकर रात के समय मरीजों और उनके परिजनों को यहां पहुंचने में कम परेशानी होती है. इसलिए सदर अस्पताल को पूर्व की तरह यथावत संचालित रखा जाना चाहिए.
तेज रफ्तार वाहनों का भी उठा मुद्दा
बैठक में यातायात व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया गया. मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मुख्य द्वार के पास तेज रफ्तार ट्रक और अन्य मालवाहक वाहनों के परिचालन से मरीजों और परिजनों को होने वाली परेशानी से आयुक्त को अवगत कराया गया. आयुक्त ने संबंधित परिवहन विभाग के पदाधिकारी से दूरभाष पर बात कर गति सीमा निर्धारित करने और जगह-जगह सूचना बोर्ड लगाने का निर्देश दिया.
आयुक्त ने दिया हरसंभव प्रयास का आश्वासन
आयुक्त ने स्वास्थ्य सेवा से जुड़े मुद्दे पर प्रतिनिधिमंडल से चर्चा करते हुए सदर अस्पताल को यथावत रखने की दिशा में हरसंभव प्रयास करने का आश्वासन दिया. प्रतिनिधिमंडल में सिविल सोसायटी के अध्यक्ष राधेश्याम वर्मा, सचिव संदीप कुमार जय बमबम, कार्यकारिणी सदस्य भवानी शंकर प्रसाद, रामाकांत साह, अनूप कुमार सिन्हा और मयंक राज शामिल थे.
