सीडब्ल्यूसी ने तीन माह में की 150 बच्चों को स्पॉन्सरशिप से जोड़ने की अनुशंसा

तीन वर्ष तक प्रत्येक माह डीबीटी के माध्यम से संयुक्त खाते में मिलेंगे चार हजार रुपये

दुमका. दुमका में बाल कल्याण समिति ने पिछले तीन माह के दौरान 150 बालक-बालिकाओं को मिशन वात्सल्य योजना के तहत स्पॉन्सरशिप स्कीम से जोड़ने की अनुशंसा एसएफसीएसी से की है. इनमें जिला बाल संरक्षण समिति के द्वारा प्रस्तुत किये गये 67, चाइल्ड हेल्पलाइन के 59 और सीडब्ल्यूसी के द्वारा पारित 24 प्रस्ताव शामिल हैं. समिति सदस्य डॉ राज कुमार उपाध्याय ने बताया कि स्पॉन्सरशिप स्कीम के तहत देखरेख और संरक्षण के जरूरतवाले यानी सीएनसीपी बालक-बालिका को तीन वर्ष तक या 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक हर माह डीबीटी के माध्यम से संयुक्त बैंक खाता में 4000 रुपये दिये जाते हैं. राशि बालक-बालिका को पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा के लिए दी जाती है. समिति द्वारा अनुसंशा किये गये स्पॉन्सरशिप आवेदनों को उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित स्पॉन्सरशिप एंड फोस्टर केयर अप्रूवल कमेटी की बैठक में रखा जाता है. बताया कि कोरोना काल में पिता की मृत्यु होने पर 19 बालक-बालिकाओं को योजना से जोड़ा गया था. 2020 से 2024 तक 132 बालक-बालिका को स्पॉन्सरशिप स्कीम से जोड़कर योजना का लाभ दिया जा रहा था. इसमें लगभग 50 बालक-बालिका 18 वर्ष की आयु पूरी होने या तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के कारण इस योजना के तहत रिस्टोर किये जा चुके हैं. शेष 82 बालक-बालिका को मार्च तक की राशि डीबीटी के माध्यम से खाते में भेजी गयी है. डीसीपीयू और सीएचएल ने किया बेहतर काम जिला बाल संरक्षण इकाई डीसीपीयू और चाइल्ड हेल्पलाईन सीएचएल ने अर्हता रखनेवाले सीएनसीपी बालक-बालिकाओं को स्पॉन्सरशिप स्कीम से जोड़ने के मामले में बेहतर काम किया है. दोनों टीमों ने आवेदनों के साथ वांछित दस्तावेजों को बनवाने में भी परिवार की सहायता की है. इसके अलावा आवेदकों का गृह सत्यापन, सामाजिक जांच प्रतिवेदन तैयार करने और उसका सेविका-मुखिया से सत्यापन करवाने की जटिल प्रक्रिया को भी कम समय में पूरी की. इन्हें मिल सकता है योजना का लाभ जिस बालक-बालिका के माता-पिता दोनों की अथवा पिता की मृत्य हो गयी है या पिता अलग रहते हैं या माता-पिता ने त्याग कर दिया है. पिता दुर्घटना या गंभीर बीमारी के कारण अनफिट हो गये हैं या बालक गंभीर बीमारी से जूझ रहा है या बालक शारीरिक या मानसिक रूप से दिव्यांग हैं, उन्हें स्पान्शरशिप स्कीम का लाभ मिल सकता है. इसके अलावा मिशन वात्सल्य के तहत बाल श्रम से रेस्क्यू किये गये चाइल्ड, रिस्क ऑफ मैरिज वाले चाइल्ड, ट्रैफिकिंग के वरनरेबल चाइल्ड, चाइल्ड बेगर, चिल्ड्रेन इन स्ट्रीट सिचुएसन, सेक्सुअल एब्युज (पोक्सो) की पीड़िता, ड्रग एब्युज के शिकार होनेवाले बालक-बालिका को भी समिति द्वारा स्पॉन्सरशिप स्कीम से जोड़ा जा सकता है.

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Author: RAKESH KUMAR

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