पेसा के अधिकारों को गांव-गांव पहुंचाने की पहल, ग्राम सभा में 50% महिला भागीदारी पर जोर

ग्राम सभा को सशक्त बनाने व पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु दामिन महिला अधिकार संघ की बैठक. 50% महिला भागीदारी पर विशेष जोर. जानें पूरी बात.

दुमका : पेसा नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन, ग्राम सभा को सशक्त बनाने और उसमें महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने को लेकर दामिन महिला अधिकार संघ दुमका की महत्वपूर्ण बैठक हुई. बैठक में पेसा कानून के प्रावधानों को गांव स्तर तक पहुंचाने तथा आदिवासी समुदाय को कानून के तहत प्राप्त अधिकारों के प्रति जागरूक करने पर विस्तार से चर्चा की गयी.

ग्राम सभा को सक्रिय बनाने पर जोर

संघ की अध्यक्ष सोनावती हांसदा ने पेसा कानून के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. पेसा कानून ग्राम सभा को स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने और समुदाय के हितों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण अधिकार देता है. इन अधिकारों का वास्तविक लाभ तभी मिल सकता है, जब ग्राम सभा नियमित रूप से सक्रिय हो और ग्रामीणों को अपने अधिकारों की जानकारी हो.

निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी जरूरी

सोनावती हांसदा ने ग्राम सभा में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि गांव के विकास, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सामाजिक मुद्दों से जुड़े निर्णयों में महिलाओं की प्रभावी भागीदारी जरूरी है. महिलाओं की केवल उपस्थिति सुनिश्चित करने के बजाय उन्हें निर्णय प्रक्रिया में अपनी बात रखने और निर्णय लेने की भूमिका दी जानी चाहिए.

पेसा के लिए कोर कमेटी का गठन

बैठक में पेसा नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कोर कमेटी का गठन किया गया. कमेटी ग्रामीणों के बीच पेसा कानून को लेकर जागरूकता अभियान चलाने, ग्राम सभा की बैठकों को मजबूत करने और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए पहल करेगी. साथ ही पेसा से जुड़े मुद्दों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखने तथा प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करने का कार्य भी करेगी.

उपायुक्त के नाम तैयार किया मांग पत्र

बैठक में दुमका उपायुक्त के नाम मांग पत्र तैयार किया गया. इसमें आदिवासी क्षेत्रों की पारंपरिक व्यवस्था को लागू करने, पेसा नियमावली के तहत समुदाय और ग्राम सभा को प्राप्त अधिकारों का क्रियान्वयन ग्राम सभा के माध्यम से सुनिश्चित करने तथा पेसा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तरीय कार्ययोजना तैयार कर उसके अनुरूप कार्रवाई करने की मांग शामिल है.

गांवों में व्यवहारिक रूप से लागू हो पेसा

संघ की सदस्यों ने कहा कि पेसा कानून का उद्देश्य केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके प्रावधानों को गांवों में व्यवहारिक रूप से लागू किया जाना चाहिए. इसके लिए ग्राम सभा को नियमित, सक्रिय और अधिकार-संपन्न बनाना जरूरी है. साथ ही पारंपरिक आदिवासी स्वशासन व्यवस्था और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को भी उचित महत्व दिया जाना चाहिए.

दर्जनों सदस्य रहीं मौजूद

बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सामाजिक एवं विकास संबंधी निर्णयों में भागीदारी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. संघ ने कहा कि 50 प्रतिशत महिला भागीदारी से ग्राम सभा अधिक समावेशी और प्रभावी बनेगी. महिलाओं को अपनी समस्याएं रखने, विकास योजनाओं पर चर्चा करने तथा गांव के संसाधनों से जुड़े निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलना चाहिए.

बैठक में सोनावती हांसदा, रोजबीन मरांडी, ललिता किस्कू, अंजूता सोरेन, प्रमिला देवी, सोनमुनी सोरेन, रीना टुडू, अंजू कुमारी, सविता हांसदा सहित दामिनी महिला अधिकार संघ की दर्जनों सदस्य मौजूद थीं.


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By Anand Jayswal

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