धान के खेतों में लहरायी हरियाली, सब्जी की नर्सरी पर बारिश की मार

सरैयाहाट में लगातार बारिश ने किसानों के खेतों का मंजर बदल दिया है. धान की फसल बम्पर होने की उम्मीद है, लेकिन सब्जी की नर्सरी जलभराव से पूरी तरह नष्ट हो गई है. किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ रही है, जिससे लागत बढ़ रही है.

सरैयाहाट : लगातार हो रही बारिश ने सरैयाहाट क्षेत्र के खेतों का मंजर बदल दिया है. धान की फसल जहां हवा के साथ लहराते हुए समृद्धि का संकेत दे रही है, वहीं सब्जी उगाने वाले किसानों के लिए यही बारिश परेशानी का कारण बन गयी है. हरियाली से ढके खेत बेहतर पैदावार की उम्मीद जगा रहे हैं, लेकिन टमाटर और मिर्च की नर्सरी में भारी नुकसान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है.

धान की फसल से बेहतर उत्पादन की उम्मीद

किसानों के अनुसार, समय पर और पर्याप्त बारिश से धान की फसल मजबूत हुई है. पौधे घने और स्वस्थ हैं, जिससे इस बार बेहतर उत्पादन की उम्मीद की जा रही है. खेतों में पानी की उपलब्धता ने सिंचाई की समस्या को भी काफी हद तक खत्म कर दिया है.

फोटो | Prabhat Khabar Network

जलभराव से नर्सरी के पौधे सड़े

दूसरी ओर, लगातार हो रही बारिश और जलभराव ने सब्जी की नर्सरी को बुरी तरह प्रभावित किया है. कई खेतों में पानी जमा रहने से नर्सरी के पौधे सड़ गये हैं. इससे किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ रही है और लागत भी बढ़ रही है.

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"टमाटर-मिर्च की नर्सरी पूरी तरह नष्ट"

प्रेमकांत यादव ने कहा कि धान की फसल इस बार काफी अच्छी स्थिति में है और खेतों में भरपूर पानी है, लेकिन टमाटर और मिर्च की नर्सरी पूरी तरह नष्ट हो चुकी है. ज्यादा पानी से पौधे सड़ गये हैं.

"फिर से बीज डालना पड़ेगा"

हरिनंदन कुमार ने कहा कि उन्होंने काफी उम्मीद के साथ सब्जी की नर्सरी लगायी थी, लेकिन लगातार बारिश ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया. अब उन्हें फिर से बीज डालना पड़ेगा, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ेगा.

"जल निकासी की व्यवस्था नहीं"

महेंद्र यादव का कहना है कि धान के लिए यह मौसम फायदेमंद है, पर सब्जी की खेती में नुकसान लगातार बढ़ रहा है. नर्सरी में पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण पौधे टिक नहीं पा रहे हैं.

धान किसानों में खुशी, सब्जी उत्पादक चिंतित

संजय कुमार ने कहा कि इस बार की बारिश ने एक तरफ धान किसानों के चेहरे पर मुस्कान लायी है, तो दूसरी तरफ सब्जी उत्पादकों के लिए चुनौती खड़ी कर दी है. किसान अब मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच संतुलन बनाकर खेती को बचाने की कोशिश में जुटे हैं.

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लेखक के बारे में

By चंद्रकांत कुमार

पिछले 14 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रखंड स्तर पर सक्रिय हूं, जहां मैंने जमीनी मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का कार्य किया है. ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकार से जुड़ी खबरों को निष्पक्ष और तथ्यपरक ढंग से प्रस्तुत करना मेरी प्राथमिकता रही है. पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और जनहित की आवाज बनने का निरंतर प्रयास है.

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