कैंपस : एनइपी केवल पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं है, बल्कि शिक्षण व अधिगम की व्यापक परिवर्तन है

सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया. शुरुआत प्रॉक्टर डॉ राजीव कुमार के स्वागत भाषण से हुई.

एसकेएमयू. यूजी लेवल पर एनइपी को प्रभावी बनाने को लेकर कार्यशाला आयोजित, बोलीं वीसी संवाददाता, दुमका सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया. शुरुआत प्रॉक्टर डॉ राजीव कुमार के स्वागत भाषण से हुई. कार्यशाला को एनइपी के सुचारू क्रियान्वयन की दिशा में निर्णायक कदम बताया. उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति का लक्ष्य शिक्षा को समावेशी, बहु-विषयी और कौशल उन्मुख बनाना है, जिसे कॉलेज स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना आवश्यक है. डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर डॉ जयनेंद्र यादव ने यूजी नामांकन प्रक्रिया से संबंधित कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रस्तुत किया. उन्होंने नामांकन में पारदर्शिता बनाये रखने, छात्रों के साथ समुचित व्यवहार करने, दस्तावेज सत्यापन के दौरान सतर्कता बरतने व पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसका कॉलेज स्तर पर विशेष ध्यान रखा जाये. कुलपति प्रो कुनुल कांडिर ने कहा कि विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि एनइपी केवल पाठ्यक्रम बदलाव नहीं है, बल्कि यह शिक्षण और अधिगम की व्यापक संस्कृति परिवर्तन है. उन्होंने सभी कॉलेजों के नोडल अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे अपने-अपने महाविद्यालयों में भी इसी प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन करें ताकि शिक्षकों और छात्रों को नयी प्रणाली की समुचित जानकारी मिल सके. कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के एनइपी नोडल अधिकारी दीपक कुमार दास ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति की संशोधित रूपरेखा की विस्तृत जानकारी प्रतिभागियों को दी. बताया कि हाल ही में उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा एनइपी नियमावली में कुछ महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं, जिन्हें शैक्षणिक सत्र 2025–29 से प्रभावी रूप से लागू किया जायेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि मेजर कोर्स के एक पेपर में अब “भारतीय ज्ञान परंपरा ” को समाहित किया गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों को भारत की सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और मूल विचारधाराओं से परिचित कराना है. इसके अतिरिक्त जिन विषयों में प्रयोगात्मक कार्य होता है, उन सभी मेजर कोर्स में अब 25 अंकों का प्रायोगिक मूल्यांकन अनिवार्य रूप से जोड़ा गया है, जिससे छात्रों की व्यावहारिक दक्षता में वृद्धि हो सके. बताया कि पूर्व प्रचलित ””माइनर विषय”” की अवधारणा को हटाकर अब ””एसोसिएटेड कोर”” और ””इलेक्टिव”” विषयों की नयी व्यवस्था लागू की जा रही है, जो छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार विषय चयन की अधिक स्वतंत्रता प्रदान करती है. साथ ही, स्किल एन्हांसमेंट कोर्स के अंतर्गत अब कंप्यूटर आधारित विषयों को शामिल किया गया है, जिससे छात्र तकनीकी रूप से दक्ष बन सकें और आधुनिक औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें. अंत में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह संशोधित नियमावली केवल उन्हीं छात्रों पर लागू होगी जो सत्र 2025–29 में नामांकित होंगे, जबकि इससे पूर्व नामांकित विद्यार्थियों की पढ़ाई पूर्ववर्ती पाठ्यक्रम एवं संरचना के अनुरूप ही संचालित की जाएगी. कार्यशाला के अंतिम सत्र में विभिन्न महाविद्यालयों से आये नोडल अधिकारियों के साथ खुला प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जहां उन्होंने कार्यान्वयन से संबंधित शंकाएं और सुझाव प्रस्तुत किया. इन सभी प्रश्नों का संतोषजनक जवाब विश्वविद्यालय की टीम ने दिया. समापन विश्वविद्यालय की सहायक डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर डॉ पूनम हेंब्रम के औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ. उन्होंने सभी प्रतिभागियों को उनके सक्रिय सहयोग और सकारात्मक सहभागिता के लिए धन्यवाद दिया. कार्यक्रम की सफलता में एनइपी टास्क फोर्स के सदस्य डॉ इंद्रजीत कुमार, सहायक मनोज, पंकज तथा अन्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने आयोजन की समस्त व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित कीं.

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By Anand jaswal

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