प्रतिनिधि, काठीकुंड : काठीकुंड प्रखंड के बड़ाचापुड़िया पंचायत अंतर्गत ढिबरी गांव में मंगलवार शाम बारिश के दौरान हुए वज्रपात ने कई पशुपालक परिवारों की कमर तोड़ दी. आकाशीय बिजली की चपेट में आने से 11 मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई. घटना में पशुपालकों को लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है. एक साथ इतने मवेशियों की मौत से प्रभावित परिवारों में मातम पसरा हुआ है.
मवेशी चरा रहे बच्चे बाल-बाल बचे
बताया गया कि मंगलवार शाम गांव के 4-5 बच्चे जंगल में मवेशियों को चरा रहे थे. इसी दौरान अचानक मौसम खराब हुआ और तेज बारिश शुरू हो गई. बच्चे मवेशियों से कुछ दूरी पर थे. इसी बीच तेज गर्जना के साथ अचानक वज्रपात हुआ और उसकी चपेट में आकर 11 मवेशियों की मौत हो गई. गनीमत रही कि चरवाहे बच्चे मवेशियों से दूर थे, जिससे उनकी जान बच गई. ग्रामीणों का कहना है कि यदि बच्चे उस समय मवेशियों के पास होते तो बड़ा हादसा हो सकता था.
पांच पशुपालक परिवारों के मवेशियों की मौत
वज्रपात की घटना में बड़का किस्कू के तीन, जेठा सोरेन के तीन, होपना हेंब्रम के दो, सुनीराम किस्कू का एक तथा घुचु किस्कू के दो मवेशियों की मौत हुई है. घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे. एक साथ 11 मवेशियों को मृत देखकर पशुपालक परिवारों के लोग भावुक हो उठे. परिवार के सदस्यों का कहना था कि मवेशी उनके लिए महज पशु नहीं, बल्कि परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण सहारा थे.
लाखों रुपये के नुकसान से परिवार सदमे में
पशुपालकों के अनुसार, मवेशियों की मौत से उन्हें लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है. ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन कई परिवारों की आय का प्रमुख साधन है. ऐसे में एक ही घटना में मवेशियों की मौत से प्रभावित परिवारों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है. अचानक हुई इस क्षति ने परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है.
मुआवजे के लिए प्रशासन से गुहार
ग्रामीणों ने प्रशासन से घटनास्थल का निरीक्षण कर मृत मवेशियों का आकलन कराने तथा प्रभावित पशुपालकों को सरकारी प्रावधान के तहत उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए मवेशियों की मौत की भरपाई करना आसान नहीं है. प्रशासन की ओर से शीघ्र सहायता मिलने से पीड़ित परिवारों को राहत मिल सकेगी.
