प्रतिनिधि, काठीकुंड
दुमका से पाकुड़ तक होने वाले कोयला परिवहन का प्रमुख मार्ग काठीकुंड का गांधी चौक इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. चौक के बीच स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा चारों ओर फैली कीचड़, धूल और गंदगी के बीच उपेक्षित खड़ी है. जिस चौक से प्रतिदिन कोयला लदे भारी वाहनों समेत सैकड़ों छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता है. वहीं बापू की प्रतिमा का रखरखाव पूरी तरह उपेक्षित दिखायी देता है. भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से सड़क की हालत जर्जर हो गयी है. बरसात में चौक के आसपास कीचड़ और जलजमाव की स्थिति बन जाती है, जबकि गर्मी में उड़ती धूल प्रतिमा और पूरे परिसर को ढक देती है.
प्रतिमा के चारों ओर लगी घेराबंदी और खड़ी दीवारों पर काली परत जम चुकी है, जिससे स्मारक की गरिमा प्रभावित हो रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय पर्वों पर प्रतिमा पर माल्यार्पण कर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है, लेकिन सालभर इसकी साफ-सफाई और रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं रहती. लोगों ने प्रशासन से गांधी चौक का सौंदर्यीकरण, प्रतिमा परिसर की नियमित सफाई, घेराबंदी की मरम्मत तथा सड़क और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त कराने की मांग की है. उनका कहना है कि जिस चौक का नाम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर है, वहां उनकी प्रतिमा की ऐसी बदहाल स्थिति संवेदनहीनता को दर्शाती है.
