प्रतिनिधि, बासुकिनाथ : जरमुंडी प्रखंड के कटेली गांव में आयोजित प्रखंड स्तरीय सार्वजनिक करमा महोत्सव में रविवार को लोक संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला. करम डाली की पूजा-अर्चना, लोकगीतों और पारंपरिक नृत्य से पूरा महोत्सव स्थल गुलजार रहा. मांदर की थाप पर ग्रामीणों के कदम थिरके तो करमा पर्व की पारंपरिक छटा जीवंत हो उठी.
दीप प्रज्ज्वलन के साथ महोत्सव का शुभारंभ
महोत्सव समिति के अध्यक्ष विजयकांत सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ ग्राम प्रधान सीताराम ने फीता काटकर एवं सामूहिक दीप प्रज्ज्वलित कर किया. करमा महोत्सव के संस्थापक लालमोहन राय ने झंडोत्तोलन कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की.
इसके बाद महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ करम पेड़ की डाली की विधिवत पूजा-अर्चना की. महिलाओं ने करम देव से परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की.
लोकगीत और नृत्य बना आकर्षण का केंद्र
इस अवसर पर आयोजित नृत्य-संगीत कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहा. पारंपरिक गीतों और मांदर की थाप पर ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. कार्यक्रम में बच्चों और युवाओं की भागीदारी भी रही, जिससे महोत्सव ने सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया.
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने पर जोर
करमा महोत्सव के संस्थापक लालमोहन राय ने कहा कि करमा पर्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा, प्रकृति प्रेम और सामाजिक एकता का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं.
सैकड़ों ग्रामीण रहे मौजूद
महोत्सव में विश्वनाथ राय, हरिप्रसाद राय, मणिकंदन राय, रामानंद राय, सुधीर सिंह, महेंद्र सिंह कुशवाहा, पंचायत मुखिया दामोदर गिरी सिंह, सिंहनी पंचायत के मुखिया आनंद राय, नीलकंठ राय, प्रभाकर सिंह, राजू राय, विकास राय, रघुनंदन राय, प्रेम राय, भागवत राय सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे.
