दुमका : संताल परगना का ऐतिहासिक मसानजोर डैम अब केवल सिंचाई, बिजली उत्पादन और पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आधुनिक मत्स्य उत्पादन और व्यापार के एक बड़े हब के रूप में उभरने की दिशा में है. मसानजोर डैम में पिछले कुछ वर्षों में केज कल्चर के जरिए मत्स्य उत्पादन में बदलाव आया है. इस सफलता को देखते हुए सरकार अब उत्पादन से आगे बढ़कर होलसेल और रिटेल मार्केट तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है.
राज्य के कुल आठ बड़े डैमों के पास स्थल चिन्हित कर ‘इंटीग्रेटेड फिश फार्मिंग’ योजना का खाका तैयार किया गया है. संताल परगना प्रमंडल से इकलौते मसानजोर डैम को इसमें शामिल किया गया है. इसके अलावा मैथन, गेतलसूद, तिलैया, तेनुघाट, चांडिल और कोनार डैम में भी यह योजना लागू की जाएगी. पूरी परियोजना में आठ प्रमुख डैमों के अलावा 11 मध्यम और 23 छोटे डैम भी शामिल हैं, जिस पर करीब 110 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है.
चार हेक्टेयर में तैयार होगा आधुनिक ढांचा
मसानजोर डैम क्षेत्र में प्रस्तावित आधारभूत संरचना के लिए लगभग चार हेक्टेयर जमीन की जरूरत बतायी गयी है. इसके तहत पूरी सप्लाई चेन को एक ही जगह विकसित करने की योजना है.
- सीड रियरिंग यूनिट के लिए 1.0 हेक्टेयर.
- अत्याधुनिक हैचरी के लिए 0.5 हेक्टेयर.
- लैंडिंग सेंटर के लिए 0.4 हेक्टेयर.
- फीड मिल के लिए 0.2 हेक्टेयर.
- प्रोसेसिंग यूनिट और आइस प्लांट के लिए 0.2-0.2 हेक्टेयर.
- फिश मार्केट, रिटेल मार्केट और वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 0.1-0.1 हेक्टेयर.
मछुआरों को मिलेगा बाजार और बेहतर दाम
पिछले दस-बारह सालों में मसानजोर डैम में फ्लोटिंग केज कल्चर तकनीक से स्थानीय विस्थापितों और पारंपरिक मछुआरों की आजीविका को नई ताकत मिली है. उत्पादन बढ़ने के बाद बाजार, पैकेजिंग और सुरक्षित भंडारण की चुनौती सामने आयी है.
स्थानीय स्तर पर थोक बाजार, लैंडिंग सेंटर और खुदरा मंडी बनने से बिचौलियों का एकाधिकार कम होने की उम्मीद है. मछुआरों को अपनी उपज की तुरंत नीलामी और सही दाम मिल सकेंगे. निदेशक मत्स्य झारखंड अमरेन्द्र कुमार की कोशिश है कि योजनाओं को जल्द गति मिले. परियोजना में केंद्र-राज्यांश द्वारा 60:40 के अनुपात में व्यय किये जाने का प्रस्ताव है.
रोजगार के खुलेंगे नए अवसर
अत्याधुनिक हैचरी, प्रोसेसिंग यूनिट और फीड मिल संचालित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है. डैम पर निर्भर ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर काम मिलने की संभावना है.
बंगाल-बिहार तक भेजी जा सकेगी मछली
मसानजोर की भौगोलिक स्थिति पश्चिम बंगाल की सीमा से सटी है. आइस प्लांट और वैल्यू-एडिशन प्रोसेसिंग यूनिट शुरू होने से मछली खराब होने का जोखिम कम होगा. इससे दुमका से बंगाल, बिहार और पूर्वोत्तर के बड़े थोक बाजारों तक मछली भेजने की संभावना बनेगी.
फिश वेस्ट से बनेगा जैविक खाद
परियोजना में वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 0.1 हेक्टेयर भूमि तय है. यहां मछलियों के अवशेषों से जैविक खाद और पूरक आहार तैयार करने की योजना है.
10 अमृत सरोवरों पर खर्च होंगे तीन करोड़
डैमों के साथ-साथ ग्रामीण जलस्रोतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 10 अमृत सरोवरों के विकास का भी प्रावधान किया गया है. प्रत्येक सरोवर पर 30 लाख रुपये खर्च कर मत्स्य पालन की बुनियादी सुविधाएं तैयार की जाएंगी. जल संसाधन विभाग के साथ तालमेल बिठाकर डैम का प्रभावी क्षेत्रफल और मत्स्य संचयन क्षमता तय की जा रही है.
विभागीय स्तर पर मिली जानकारी के मुताबिक आने वाले समय में दुमका जिला एक फिश हब के रूप में विकसित होगा. छोटे-छोटे जलाशयों जैसे दिगलपहाड़ी, कैराबनी, बंकीबेड़ा, गढ़द्वारा डैम आदि में झींगा पालन तथा आरएफएफ की योजना प्रस्तावित है.
व्यावसायिक केंद्र बनने की उम्मीद
जिला मत्स्य पदाधिकारी दुमका प्रशांत कुमार दीपक ने कहा, "संताल परगना प्रमंडल में इकलौते दुमका के मसानजोर के समीप इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है. जल संसाधन विभाग के साथ मिलकर स्थल चयन कर योजना को शीघ्र धरातल पर उतारने की पहल होगी. यह इस इलाके के मत्स्यपालकों के लिए बहुत बड़ा व्यावसायिक केंद्र साबित होगा."
