ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने की अनूठी पहल

इन केंद्रों का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, जैविक खेती, कीट-रोग प्रबंधन एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराना है.

दुमका. बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची से संबद्ध तिलका मांझी कृषि महाविद्यालय गोड्डा के बीएससी (कृषि) सातवें सेमेस्टर के छात्रों द्वारा ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव एवं कृषि औद्योगिक संलग्नता कार्यक्रम के तहत शिकारीपाड़ा प्रखंड के विभिन्न गांवों में कृषि सूचना केंद्र स्थापित किए गए. इन केंद्रों का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, जैविक खेती, कीट-रोग प्रबंधन एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराना है. शिकारीपाड़ा प्रखंड अंतर्गत सिरुवाडीह गांव के प्राथमिक विद्यालय में स्थापित कृषि सूचना केंद्र का उद्घाटन कृषि विज्ञान केंद्र दुमका के प्रधान सह तिलका मांझी कृषि महाविद्यालय गोड्डा के सह-अधिष्ठाता डॉ अमृत कुमार झा एवं ग्राम प्रधान मिरु हांसदा ने संयुक्त रूप से किया. इस अवसर पर प्राध्यापक डॉ अभिजीत सत्पथी, डॉ अजिता सोरेन, डॉ अंकित तिवारी, विद्यालय के शिक्षक सुसारी हेंब्रम व राजेश कुमार मंडल उपस्थित थे. इस केंद्र की स्थापना में छात्राएं काजल कुमारी, पूनम कुमारी, मुस्कान कुमारी, मलका आफ़रीन, मनीषा कुमारी, सोनम कुमारी गुप्ता, रिया सृष्टि एवं ज्योति महतो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. इसी क्रम में ग्राम गंदरकपुर के मंडल टोला स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या–1 में भी कृषि सूचना केंद्र की स्थापना की गयी, जिसका उद्घाटन मुखिया सूरजमुखी हेंब्रम, ग्राम प्रधान निताई चंद्र गोराई तथा सह-अधिष्ठाता डॉ अमृत कुमार झा द्वारा किया गया. समारोह में कृषि विज्ञान केंद्र दुमका के वैज्ञानिक डॉ बीके मेहता की भी उपस्थिति रही. कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने किसानों को अजोला के उपयोग के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अजोला जैविक नाइट्रोजन का उत्तम स्रोत है, जिससे धान की खेती में मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और पशुपालन में यह पौष्टिक हरे चारे के रूप में भी उपयोगी है. कार्यक्रम में छात्रों के पांचवें समूह के सदस्य प्रियांशु तिवारी, मयंक सिन्हा, सोभी उरांव, पीयूष कुमार एवं गौरव कुमार तिवारी ने सक्रिय भूमिका निभायी. स्थानीय किसानों एवं ग्रामीणों ने कृषि सूचना केंद्र की स्थापना और दी गयी जानकारियों की सराहना की. शिक्षकों ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक कृषि ज्ञान के प्रसार और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.

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Published by: Binay kumar

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