राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी को दी गयी भावभीनी श्रद्धांजलि

दुमका सेवा केंद्र की संचालिका बीके जयमाला ने दादी जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारीज की प्रमुख 101 वर्षीय राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने अहमदाबाद के जाइडिस अस्पताल में रात 1.20 बजे अंतिम सांस ली.

सांसद नलिन सोरेन, विधायक डॉ लोईस मरांडी व देवेंद्र कुंवर ने भी अर्पित किया श्रद्धासुमन

नारी शक्ति के सबसे बड़े संगठन ब्रह्माकुमारीज की स्थापना की रहीं थीं साक्षी

संवाददाता, दुमकाप्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के दुमका शाखा ने शुक्रवार को श्रद्धांजलि सभा आयोजित की. इसमें एसकेएमयू के कुलपति प्रोफेसर डॉ बिमल प्रसाद सिंह, सांसद नलिन सोरेन, जामा की विधायक डॉ लोईस मरांडी, जरमुंडी विधायक देवेंद्र कुंवर ने श्रद्धांजलि दादी जी को अर्पित की. दुमका सेवा केंद्र की संचालिका बीके जयमाला ने दादी जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारीज की प्रमुख 101 वर्षीय राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने अहमदाबाद के जाइडिस अस्पताल में रात 1.20 बजे अंतिम सांस ली. वे महज 13 वर्ष की अल्पायु में ही ब्रह्माकुमारीज से जुड़ीं और पूरा जीवन समाज कल्याण में समर्पित कर दिया. 101 वर्ष की आयु में भी दादी की दिनचर्या अलसुबह ब्रह्ममुहूर्त में 3.30 बजे से शुरू हो जाती थी. सबसे पहले वह परमपिता शिव परमात्मा का ध्यान करती थीं. राजयोग मेडिटेशन उनकी दिनचर्या में शामिल रहा. 25 मार्च 1925 को सिंध हैदराबाद के साधारण परिवार में देवी स्वरूपा बेटी ने जन्म लिया. माता-पिता ने नाम रखा लक्ष्मी. किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि उनकी बेटी अध्यात्म और नारी शक्ति का जगमग सितारा बनकर सारे जग को रोशन करेगी. बचपन से अध्यात्म के प्रति लगन और परमात्मा को पाने की चाह में मात्र 13 वर्ष की उम्र में लक्ष्मी ने विश्व शांति और नारी सशक्तीकरण की मुहिम में खुद को झोंक दिया.

87 वर्ष की यात्रा की रहीं साक्षी

बीके जयमाला ने बताया कि दादी वर्ष 1937 में ब्रह्माकुमारीज की स्थापना से लेकर आज तक 87 वर्ष की यात्रा की साक्षी रहीं. पिछले 40 से अधिक वर्ष से संगठन के ही युवा प्रभाग की अध्यक्षा की भी जिम्मेदारी संभालती रही, उनके नेतृत्व में युवा प्रभाग द्वारा देशभर में अनेक राष्ट्रीय युवा पदयात्रा, साइकिल यात्रा और अन्य अभियान चलाये गये. वर्ष 1996 में ब्रह्माकुमारीज की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में तय हुई कि अब विधिवत बेटियों को ब्रह्माकुमारी बनने की ट्रेनिंग दी जायेगी. इसके लिए ट्रेनिंग सेंटर बनाया गया. तत्कालीन मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि ने उनको ट्रेनिंग प्रोग्राम की हेड नियुक्त किया. तब से अंत समय तक वे बहनों की नियुक्ति और ट्रेनिंग की जिम्मेदारी दादीजी के हाथों में रही, उनके नेतृत्व में अब तक 6000 सेवा केंद्रों की नींव रखी गयी है.40 साल से युवा प्रभाग की संभाल रहीं थी कमान

युवा प्रभाग द्वारा दादीजी के नेतृत्व में 2006 में निकाली गयी स्वर्णिम भारत युवा पदयात्रा ने ब्रह्माकुमारीज के इतिहास में नया अध्याय लिख दिया. 20 अगस्त 2006 को मुंबई से यात्रा का शुभारंभ किया गया. 29 अगस्त 2006 का तीनसुकिया असम में समापन किया गया. स्वर्णिम भारत युवा पदयात्रा से देश में 30 हजार किमी का सफर तय किया. सवा करोड़ लोगों को शांति, प्रेम, एकता, सौहार्द्र, विश्व बंधुत्व, अध्यात्म, व्यसनमुक्ति और राजयोग ध्यान का संदेश दिया गया. इससे पहले दादी के ही नेतृत्व में 1985 में भारत एकता युवा पदयात्रा निकाली गयी थी. यात्रा में 12550 किमी की दूरी तय की गयी. कार्यक्रम में संस्था के सभी सदस्यों ने भी अपनी श्रद्धासुमन अर्पित किया. मुख्य रूप से डॉ पीयूष रंजन, बीके रेखा, बंटी अग्रवाल, अर्जुन हरनानी, राजू अग्रवाल, रामप्रवेश पंडित, राजीव कुमार, अरुणा घीड़िया, संदीप कुमार जय आदि मौजूद थे.

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By Anand jaswal

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