स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन! वर्षों से एक ही जगह जमे लिपिकों की होगी गहन जांच

दुमका स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से जमे लिपिकों के कामकाज और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच होगी.निदेशालय ने अनियमितताओं की शिकायतों के बाद कड़े निर्देश जारी किये हैं.


दुमका. झारखंड स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से एक ही जगह पर पदस्थापित रहे लिपिकों के पुराने कामकाज की अब बारीकी से पड़ताल होगी. जनप्रतिनिधियों और अन्य स्रोतों से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद स्वास्थ्य निदेशालय ने कई जिलों के सिविल सर्जनों को ऐसे लिपिकों के पूरे कार्यकाल की जांच कराने का निर्देश दिया है. इससे वित्तीय मामलों, दवा खरीद, भंडार और कार्यालयी प्रक्रियाओं से जुड़े पुराने रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आ सकते हैं.

पदस्थापना से लेकर वित्तीय भूमिका तक की होगी जांच

इस संबंध में निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सिद्धार्थ सान्याल ने आदेश जारी किया है. निर्देश के अनुसार संबंधित लिपिक कितने वर्षों तक एक ही स्थान पर पदस्थापित रहे, इस दौरान उन्होंने कौन-कौन से कार्य किए और वित्तीय मामलों में उनकी क्या भूमिका रही, इसकी जानकारी जुटायी जायेगी. जांच में खरीद एवं भंडार से जुड़े कार्यों में संभावित अनियमितताओं को भी देखा जायेगा. साथ ही संबंधित कर्मियों के खिलाफ पहले कभी कोई शिकायत, परिवाद, विभागीय जांच या कानूनी कार्रवाई हुई है या नहीं, इसकी भी जानकारी मांगी गयी है.

पहले हुआ तबादला, अब पुराने कार्यकाल की होगी पड़ताल

निदेशालय के अनुसार लंबे समय तक एक ही संस्थान में पदस्थापना रहने से कुछ मामलों में प्रभाव का इस्तेमाल कर जांच प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. इसी वजह से पहले ऐसे कर्मियों का स्थानांतरण किया गया और अब उनके कार्यकाल की विस्तृत जांच कराने की प्रक्रिया शुरू की गयी है.

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विभाग सख्त

स्वास्थ्य निदेशालय को जनप्रतिनिधियों तथा अन्य स्रोतों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई लिपिक वर्षों तक एक ही संस्थान में बने रहे. शिकायतों में लंबे समय तक एक ही जगह पदस्थापना को लेकर सवाल उठाये गये थे. इसके बाद विभाग ने पुराने कार्यकाल की समीक्षा कराने का निर्णय लिया है.

हर जिम्मेदारी और कामकाज का मांगा गया ब्योरा

जांच के लिए संबंधित लिपिकों के पदस्थापन की अवधि से लेकर उनके जिम्मे रहे कामों तक की जानकारी मांगी गयी है. वित्तीय मामलों में भूमिका, खरीद, भंडार और अन्य कार्यालयी कार्यों की भी पड़ताल होगी. इससे विभाग यह जानने की कोशिश करेगा कि लंबे कार्यकाल के दौरान कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई.

पुरानी शिकायतों और जांच का भी खुलेगा रिकॉर्ड

जांच के दौरान यह भी पता लगाया जायेगा कि संबंधित लिपिक के खिलाफ पूर्व में कोई शिकायत या परिवाद दर्ज हुआ था या नहीं. विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई से जुड़े मामलों की जानकारी भी प्रतिवेदन में शामिल करनी होगी. इससे पुराने मामलों को एक साथ सामने लाने और उनकी स्थिति की समीक्षा करने में मदद मिल सकती है.

गंभीर गड़बड़ी मिली तो विशेष जांच का प्रस्ताव

स्वास्थ्य निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान गंभीर अनियमितता सामने आती है तो विशेष जांच का प्रस्ताव निदेशालय को भेजा जायेगा. इसके बाद मामले की गंभीरता के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है.

इन जिलों के सिविल सर्जनों को भेजा गया आदेश

स्वास्थ्य निदेशालय का यह आदेश रांची, दुमका, देवघर, पलामू, जामताड़ा, गुमला, पाकुड़, सिमडेगा, गढ़वा और हजारीबाग समेत कई जिलों के सिविल सर्जनों को भेजा गया है. संबंधित जिलों से मांगी गयी जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी.


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By Anand Jayswal

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