चना से अरहर तक नौ अनाज, गोपीकांदर में शुरू हुई जावा जगाने की रस्म

गोपीकांदर में करम पर्व की धूम, युवतियां नौ अनाजों के बीज बोकर 'जावा जगाने' की पारंपरिक रस्म में जुटीं. जानिए क्या है इसका महत्व.

प्रतिनिधि, गोपीकांदर .करम पर्व नजदीक आते ही गोपीकांदर प्रखंड मुख्यालय समेत विभिन्न गांवों में इसकी तैयारियां तेज हो गयी हैं. मंगलवार को गोपीकांदर, पलासबनी, आरीचुआं, गोढ़ी, पिनरगढ़िया, मुड़ासाल, दलदली, दिगल खरौनी और कारूडीह समेत कई गांवों में करम पर्व की पारंपरिक तैयारियां शुरू की गयीं. गांव की कुंवारी युवतियों ने नहा-धोकर नयी टोकरियों में नदी से लायी गयी बालू डालकर उसमें नौ तरह के अनाजों के बीज बोये.

नौ अनाजों के बीज से तैयार होगा जावा

जावा जगाने के लिए चना, गेहूं, मकई, धान, उड़द, बाजरा और अरहर समेत विभिन्न अनाजों के बीज बोये गये हैं. युवतियों ने बताया कि बुधवार से जावा जगाने की पारंपरिक विधि शुरू होगी. करम पूजा में अंकुरित जावा का विशेष महत्व माना जाता है.

करम गीतों से जगेगा जावा

23 सितंबर को होने वाली करम पूजा तक पूजा में बैठने वाली युवतियां जावा की नियमित देखभाल करेंगी. हल्दी मिले पानी का छिड़काव करने के साथ करम गीत गाकर जावा जगाने की विधि पूरी की जायेगी. पूजा के दौरान तैयार हुए अंकुरित जावा को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है. पूजा के बाद जावा को कानों में खोंसने की भी परंपरा है.

पूजा स्थलों की हो रही साफ-सफाई

करम पर्व को लेकर गांवों में पूजा स्थलों के आसपास साफ-सफाई का काम भी शुरू कर दिया गया है. कई स्थानों पर पूजा स्थल का रंग-रोगन कराया जा रहा है. पर्व को लेकर युवतियों और ग्रामीणों में उत्साह है और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ करम पूजा की तैयारियां की जा रही हैं.

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By Prabhat khabar news desk

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