दुमका के दिनेश मुर्मू बने BSF महानिरीक्षक, गांव से दिल्ली तक देशसेवा का सफर

दुमका के दिनेश मुर्मू BSF में महानिरीक्षक बने,मिशन स्कूल से शुरू सफर, सीमा सुरक्षा से लेकर नक्सल इलाकों तक, जानें उनकी प्रेरणादायक कहानी.

आगस्टीन हेम्ब्रम, दुमका: दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड के बेनगड़िया गांव के ठकरानटोला निवासी दिनेश मुर्मू सीमा सुरक्षा बल (BSF) में महानिरीक्षक (IG) के पद पर पदस्थापित हुए हैं. देश की आंतरिक और सीमा सुरक्षा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले दिनेश मुर्मू वर्तमान में सहायक प्रशिक्षण केंद्र, बैकुंठपुर में महानिरीक्षक के रूप में सेवा दे रहे हैं.

उनकी उपलब्धि की खबर से बेनगड़िया समेत पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है. ग्रामीण और शुभचिंतक उन्हें बधाई दे रहे हैं. प्रशिक्षण केंद्र में भी उनके कुशल मार्गदर्शन में जवानों और नवयुवकों को प्रशिक्षण देकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया जा रहा है.

मिशन स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई, संत जेवियर कॉलेज तक पहुंचे

दिनेश मुर्मू की प्रारंभिक शिक्षा बेनगड़िया मिशन स्कूल से शुरू हुई. इसके बाद उन्होंने 1983 में संत जोसेफ उच्च विद्यालय, गुहियाजोरी, दुमका से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की.

उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने संत जेवियर कॉलेज, रांची में दाखिला लिया. वर्ष 1990 में उन्होंने विज्ञान विषय में जियोलॉजी से प्रथम श्रेणी में स्नातक की डिग्री हासिल की. बचपन से ही देशसेवा के प्रति उनका रुझान रहा और इसी जुनून ने उन्हें सुरक्षा बल की सेवा की ओर प्रेरित किया.

1990 में BSF में सहायक कमांडेंट के रूप में चयन

दिसंबर 1990 में सीमा सुरक्षा बल की सीधी भर्ती में दिनेश मुर्मू का चयन सहायक कमांडेंट के पद पर हुआ. इसके बाद उन्होंने BSF अकादमी, टेकनपुर, ग्वालियर, मध्य प्रदेश में प्रशिक्षण प्राप्त किया.

प्रशिक्षण के बाद उन्होंने पंजाब और जम्मू-कश्मीर में उस दौर में सेवाएं दीं, जब दोनों क्षेत्रों में उग्रवाद गंभीर चुनौती बना हुआ था. वर्ष 1997 तक उन्होंने इन क्षेत्रों में जिम्मेदारी संभाली और प्रभावी रणनीति के जरिये उग्रवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में भूमिका निभायी.

जवानों से लेकर पुलिस कमांडो तक को दिया प्रशिक्षण

इसके बाद दिनेश मुर्मू ने ट्रेनिंग सेंटर एंड स्कूल, मेरू, हजारीबाग में प्रशिक्षण प्रशिक्षक के रूप में जिम्मेदारी संभाली. उन्होंने नव आरक्षक जवानों के बुनियादी प्रशिक्षण के साथ-साथ विभिन्न राज्यों की पुलिस को भी प्रशिक्षण दिया.

उनके अनुसार, आंध्र प्रदेश पुलिस, गुजरात पुलिस और बिहार पुलिस के जवानों को कमांडो प्रशिक्षण देने का अवसर भी मिला. प्रशिक्षण के क्षेत्र में लंबे अनुभव के कारण उन्होंने सुरक्षा बलों की तैयारियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.

भारत-बांग्लादेश और भारत-पाक सीमा पर भी निभायी ड्यूटी

दिनेश मुर्मू भारत-बांग्लादेश सीमा और भारत-पाक सीमा के अलावा नक्सल प्रभावित इलाकों में भी तैनात रह चुके हैं. संवेदनशील और दुर्गम क्षेत्रों में उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जिम्मेदारी निभायी.

अपने अनुभव, सूझबूझ और साहस के कारण उन्होंने कई महत्वपूर्ण अभियानों में भूमिका निभायी. उनके कार्यकाल के दौरान सुरक्षा बलों को संभावित खतरों से बचाने और अग्रिम सूचना उपलब्ध कराने में भी उनका योगदान रहा.

छत्तीसगढ़ में ढाई साल तक निभायी अहम भूमिका

वर्ष 2020 में उप महानिरीक्षक (सामान्य) के रूप में दिनेश मुर्मू की छत्तीसगढ़ में तैनाती हुई. वहां उन्होंने करीब ढाई साल तक एंटी नेशनल रोल में सेवाएं दीं.

इस दौरान उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के साथ काम किया और कई नक्सलियों को मुख्यधारा में जोड़ने के प्रयासों में भूमिका निभायी. उन्होंने सुरक्षा बलों के कार्मिकों को संभावित खतरों को लेकर अग्रिम सूचना उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया.

2023 में BSF मुख्यालय दिल्ली में मिली जिम्मेदारी

उनके व्यापक अनुभव और कार्यक्षमता को देखते हुए वर्ष 2023 में उन्हें BSF मुख्यालय, नई दिल्ली में उप महानिरीक्षक (स्टाफ) के पद पर पदस्थापित किया गया. यहां उन्होंने करीब ढाई वर्ष तक सेवाएं दीं.

देश की सुरक्षा के प्रति उनकी लगन, मेहनत और समर्पित कार्यों की वरिष्ठ अधिकारियों ने कई बार सराहना की. उन्हें तीन बार DG's Commendation Roll से सम्मानित किया गया. वहीं वर्ष 2025 में सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक से भी नवाजा गया.

स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को करेंगे प्रेरित

दिनेश मुर्मू अपने संघर्ष और सफलता की कहानी को विद्यार्थियों तक पहुंचाने को भी महत्वपूर्ण मानते हैं. बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वह प्रारंभिक और मिडिल स्कूलों में जाकर छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन कर चुके हैं.

अब उनका प्रयास संत जोसेफ उच्च विद्यालय, गुहियाजोरी जाने का है, जहां से उन्होंने मैट्रिक की शिक्षा पूरी की थी. उनका मानना है कि विद्यार्थियों को मेहनत, अनुशासन और देशसेवा के प्रति प्रेरित करना समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान है.

गांव के बेटे की उपलब्धि पर क्षेत्र में खुशी

बेनगड़िया के ठकरानटोला से निकलकर BSF के महानिरीक्षक पद तक पहुंचने वाले दिनेश मुर्मू की उपलब्धि क्षेत्र के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का विषय बनी है. उनकी यात्रा शिक्षा, अनुशासन, मेहनत और देशसेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण पेश करती है.

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By Prabhat khabar news desk

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