Dumka Water Crisis, काठीकुंड (अभिषेक की रिपोर्ट): विकास के तमाम दावों के बीच दुमका जिले के काठीकुंड प्रखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो ग्रामीण विकास की जमीनी हकीकत को बयां करती है. प्रखंड की आसनपहाड़ी पंचायत अंतर्गत आसनबनी (नीचे टोला) के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं. आदिवासी बहुल इस टोला में मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीणों को हर दिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इस इलाके में लगभग 10 परिवार निवास करते हैं, जिनकी कुल आबादी 50 से अधिक है और इस पूरी आबादी के लिए गांव में मात्र एक चापानल उपलब्ध है.
इसी एकमात्र चापानल पर निर्भर है पूरी आबादी
पूरे टोला के लोग अपनी दैनिक जरूरतों और पीने के पानी के लिए इसी एकमात्र स्रोत पर निर्भर हैं. ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान में चापानल चालू स्थिति में तो है, लेकिन इसके खराब होते ही संकट खड़ा हो जाता है. ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को विवश होकर नदी के दूषित पानी से अपनी प्यास बुझानी पड़ती है. गर्मी के मौसम में जलस्तर नीचे जाने और बरसात में पानी गंदा होने के कारण स्वच्छ पेयजल की समस्या गंभीर रूप ले लेती है.
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कच्ची सड़क और कीचड़ ने बढ़ाई मुसीबत
पानी के साथ-साथ आवागमन भी यहां की एक बड़ी समस्या है. जंगली क्षेत्र से सटे होने के कारण इस टोला का जीवन पहले ही कठिन है, ऊपर से गांव तक पहुंचने वाली सड़क अब भी कच्ची है. बरसात के दिनों में यह सड़क कीचड़ और फिसलन के कारण चलने लायक नहीं रह जाती. इससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है क्योंकि उनका स्कूल जाना दूभर हो जाता है. वहीं, किसी के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल ले जाना या ग्रामीणों का बाजार तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन जाता है.
प्रशासन से गुहार: नल-जल योजना और पक्की सड़क की मांग
गांव की बदहाली से त्रस्त ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई है. ग्रामीणों की मांग है कि गांव में पेयजल की समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक और बोरिंग कराई जाए या राज्य सरकार की ‘नल-जल योजना’ के तहत जलमीनार की व्यवस्था की जाए. इसके साथ ही, आवागमन को सुगम बनाने के लिए कच्ची सड़क के पक्कीकरण की मांग भी जोर पकड़ रही है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो उनका जीवन और भी कष्टकारी हो जाएगा.
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