संवाददाता, दुमका: दुमका रेलवे स्टेशन स्थित कोल साइडिंग के डंपिंग साइट पर बुधवार की रात दर्दनाक हादसे में लोडर की चपेट में आने से गार्ड मंतोष कुमार खिरहर गंभीर रूप से घायल हो गए. हादसे के बाद उन्हें दुमका सदर अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया.
मंतोष जामा प्रखंड के ताराजोड़ा गांव के रहने वाले थे और पिछले करीब तीन वर्षों से इसी कोल साइडिंग में काम कर रहे थे. हादसे के वक्त उनका बेटा अमितोष कुमार खिरहर भी वहीं काम कर रहा था. बेटे की आंखों के सामने पिता लोडर की चपेट में आ गए. हादसे के बाद अमितोष बदहवास हो गया.
घटना की सूचना मिलते ही ताराजोड़ा गांव से परिजन और ग्रामीण दुमका सदर अस्पताल पहुंचे. परिजनों के विलाप से अस्पताल परिसर का माहौल गमगीन हो गया.
लोडिंग के दौरान लोडर की चपेट में आये मंतोष
जानकारी के अनुसार, मंतोष बुधवार की रात डंपिंग साइट पर ड्यूटी कर रहे थे. इसी दौरान कोयला हटाने और लोडिंग के काम में लगा लोडर अचानक उनकी ओर आया और उन्हें अपनी चपेट में ले लिया.
हादसे में मंतोष गंभीर रूप से घायल हो गए. घटनास्थल पर मौजूद उनका बेटा अमितोष दौड़कर पिता के पास पहुंचा. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लोडर से बचने के दौरान अमितोष ने उछलकर अपनी जान बचायी, जबकि उसके पिता उसकी चपेट में आ गए.
गंभीर रूप से घायल मंतोष को बीजीआर कंपनी के वाहन से दुमका सदर अस्पताल लाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
बेटे के सामने पिता की मौत, अस्पताल में मचा कोहराम
हादसे की खबर फैलते ही गुरुवार की सुबह सदर अस्पताल में परिजनों और ग्रामीणों की भीड़ जुटने लगी. पिता की मौत से अमितोष समेत परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था.
ताराजोड़ा गांव से पहुंचे ग्रामीणों ने मंतोष की मौत पर दुख जताते हुए डंपिंग साइट पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाये.
भारी मशीनों के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि डंपिंग साइट पर भारी मशीनों और वाहनों के संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जाता है. रात में काम करने वाले कर्मियों की सुरक्षा के लिए भी पर्याप्त इंतजाम नहीं होने का आरोप लगाया गया.
ग्रामीणों ने हादसे की निष्पक्ष जांच कराने, दुर्घटना के लिए जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है.
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एक करोड़ मुआवजा और आश्रित को नौकरी की मांग
मंतोष की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने मृतक के आश्रित को नौकरी देने के साथ एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है.
परिजनों का कहना है कि मंतोष परिवार के भरण-पोषण का मुख्य सहारा थे. उनकी अचानक मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. ऐसे में पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और आश्रित को नौकरी मिलना जरूरी है.
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित कंपनी से मांग की है कि पीड़ित परिवार को जल्द उचित सहायता दी जाए और कोल साइडिंग के डंपिंग साइट पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े.
