दुमका से पवन पंडित की रिपोर्ट
Maiya Samman Yojana Dumka, दुमका : दुमका जिले के मसलिया प्रखंड अंतर्गत गुमरो पंचायत भवन परिसर में सोमवार को ‘मंइयां सम्मान योजना’ के भौतिक सत्यापन के दौरान प्रशासन और स्थानीय कर्मियों की कुप्रबंधन का नजारा देखने को मिला. सत्यापन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए पहुंचीं हजारों महिलाओं की भारी भीड़ के कारण पूरे परिसर में पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी. स्थिति ये थी चिलचिलाती धूप में प्रशासन ने पीने के पानी तक की बुनियादी व्यवस्था नहीं की थी, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा. जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद सभी सार्वजनिक स्थलों पर पानी की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था.
भीषण उमस में बेहाल हुईं महिलाएं, छांव तक का नहीं था इंतजाम
योजना के सत्यापन कार्य के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, विशेषकर महिलाएं और बुजुर्ग पंचायत भवन पहुंचने लगे थे. दोपहर होते-होते भीड़ का आंकड़ा हजारों के पार पहुंच गया। कड़कड़ाती धूप और उमस के बीच घंटों लाइन में खड़ी दर्जनों महिलाएं चक्कर खाकर गिरने की स्थिति में आ गईं. धूप से बचने के लिए परिसर में छांव की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई थी, जिसके कारण गोद में दुधमुंहे बच्चों को लिए महिलाएं पेड़ की छांव और दीवारों की ओट में छिपने को मजबूर दिखीं.
पानी का एक टैंकर तक नहीं, बूंद-बूंद को तरसे लोग
मई की इस तपती गर्मी में पंचायत भवन परिसर में पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं था. इतने बड़े पैमाने पर महिलाओं को बुलाए जाने के बावजूद न तो कोई वाटर टैंकर मंगाया गया था और न ही ओआरएस या मेडिकल किट की कोई आपातकालीन व्यवस्था थी. प्यास से बेहाल लोग पानी के लिए आसपास के हैंडपंपों की तरफ भागते दिखे. महिलाओं ने आक्रोश जताते हुए कहा कि इतने बड़े आयोजन की पूर्व सूचना होने के बावजूद प्रशासन ने पानी जैसी अनिवार्य जरूरत को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया.
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मुखिया और वार्ड सदस्य सूचना से बेखबर
भीड़ के अनुपात में सत्यापन करने वाले कर्मियों की संख्या बेहद कम होने के कारण भौतिक सत्यापन की रफ्तार कछुआ गति से चल रही थी. घंटों इंतजार करने के बाद भी जब नंबर नहीं आया, तो ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया, जिससे परिसर में कई बार तीखी नोकझोंक और अफरा-तफरी की स्थिति बनी. मौके पर मौजूद पंचायत सचिव आकाश कुमार ने बताया कि भौतिक सत्यापन का यह कार्य केवल उनके और उनके पंचायत सहायक द्वारा किया जा रहा है. हैरानी की बात यह है कि इस बड़े आयोजन को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी अंधेरे में रखा गया. पंचायत की मुखिया सावित्री मुर्मू ने स्पष्ट कहा कि उन्हें इस सत्यापन कार्य की कोई पूर्व जानकारी ही नहीं दी गई थी. वहीं, पंचायत के वार्ड सदस्यों और आंगनवाड़ी सेविकाओं को भी इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं थी.
बीडीओ बोले- रांची में हूं ट्रेनिंग पर
इस अव्यवस्था और कुप्रबंधन के विषय में जब मसलिया के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) अजफर हसनैन से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि वे फिलहाल रांची में एक सरकारी ट्रेनिंग के लिए आए हुए हैं. प्रखंड स्तर पर आला अधिकारियों की अनुपस्थिति और जनप्रतिनिधियों को विश्वास में न लेने के कारण यह पूरा आयोजन अराजकता की भेंट चढ़ गया. अब स्थानीय स्तर पर यह गंभीर सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की भीड़ को पंचायत सचिव ने बिना पूर्व तैयारी के बुला कैसे लिया? क्या महज दो लोग पूरी पंचायत की महिलाओं का सत्यापन सुचारू रूप से कर सकते थे? यदि नहीं, तो फिर इन गरीब और ग्रामीण महिलाओं के बैठने, छांव और पानी की मुकम्मल व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
