दुमका : दुमका जिले के पांजनबोना, दुहुमुर्गा और गुलामशूली समेत विभिन्न गांवों में ''कुल्ही दुरुप'' (ग्राम बैठक) का आयोजन किया गया. लेखा होड़ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में संताली भाषा और उसकी मौलिक ओलचिकी लिपि के संरक्षण तथा शैक्षणिक विकास को लेकर एक स्वर में मांग उठाई गई.
ओलचिकी में पाठ्य सामग्री तैयार करने की मांग
ग्रामीणों ने केंद्र सरकार के अधीन एनसीईआरटी (NCERT) और अन्य शैक्षणिक संस्थानों से संताली भाषा की सभी पाठ्यपुस्तकों, शिक्षक मार्गदर्शिकाओं, कार्यपुस्तिकाओं और डिजिटल शैक्षणिक संसाधनों को मौलिक ओलचिकी लिपि में ही तैयार व प्रकाशित करने की पुरजोर मांग की.
रघुवर दास की पहल पर जताया आभार
ज्ञात हो कि हाल ही में ''परसी आरीचाली मरांग बुरु अखड़ा'' के बैनर तले विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास से मुलाकात कर यह मांग रखी थी. इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए श्री दास ने दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी से मिलकर ज्ञापन सौंपा था. इस सकारात्मक पहल के लिए कुल्ही दुरुप में उपस्थित ग्रामीणों और समस्त संताल आदिवासी समाज ने रघुवर दास के प्रति हार्दिक आभार एवं जोहार व्यक्त किया.
मातृभाषा में शिक्षा को बताया महत्वपूर्ण
ग्रामीणों ने कहा कि संताली भाषा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल है और ओलचिकी लिपि को यूनिकोड की मान्यता प्राप्त है. पंडित रघुनाथ मुर्मू के सपने को साकार करते हुए ओलचिकी लिपि में एनसीईआरटी की पुस्तकें मिलने से झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और असम के लाखों संताली विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में सुगमता होगी.
जागरूकता अभियान जारी रखने का संकल्प
बैठक में संताली भाषा और शिक्षा को मजबूत करने के लिए भविष्य में भी जागरूकता अभियान जारी रखने का संकल्प लिया गया. इस अवसर पर सुबान सोरेन, लखन हसदा, सनत हेम्बरम, रवीन्द्र सोरेन, सुनील किस्कू, मती सोरेन, ललीता हेम्ब्रम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं एवं बुजुर्ग उपस्थित रहे.
