सावन पर दानीनाथ मंदिर में पूरे महीने श्रृंगारी पूजा व संध्या आरती का होगा आयोजन, तैयारियां जोरो पर

सावन के पवित्र महीने में बाबा दानीनाथ मंदिर में विशेष श्रृंगारी पूजा, रुद्राभिषेक और संध्या आरती का आयोजन होगा। श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

प्रतिनिधि, काठीकुंड

श्रावण मास को लेकर काठीकुंड प्रखंड स्थित ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध बाबा दानीनाथ मंदिर में तैयारियां जोरो पर है. पूरे सावन माह में प्रतिदिन भगवान शिव की विशेष श्रृंगारी पूजा, रुद्राभिषेक, संध्या महाआरती एवं भजन-कीर्तन का आयोजन होगा. मंदिर समिति की ओर से मंदिर परिसर की साफ-सफाई, रंग-रोगन, विद्युत सज्जा एवं श्रद्धालुओं के ठहराव की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही है. सावन के पहले सोमवार से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है. सुबह से देर शाम तक जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना का क्रम चलेगा. प्रत्येक संध्या भगवान भोलेनाथ की भव्य आरती होगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे.

दानीनाथ मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) और बाबा बासुकिनाथ धाम में जलार्पण करने के बाद इस मार्ग से गुजरने वाले बड़ी संख्या में कांवरिये तथा स्थानीय शिवभक्त बाबा दानीनाथ मंदिर में भी जलार्पण एवं पूजा-अर्चना करना नहीं भूलते. वर्षों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा के कारण सावन माह में मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. आसपास के गांवों के अलावा दुमका, पाकुड़ तथा अन्य क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते है. मंदिर समिति के अनुसार पूरे सावन माह प्रतिदिन भगवान भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार किया जाएगा. वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा एवं पुष्प अर्पित किए जाएंगे. सोमवार को विशेष रुद्राभिषेक एवं सामूहिक पूजा का आयोजन होगा. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कतारबद्ध दर्शन, पेयजल एवं सुरक्षा की व्यवस्था भी की जा रही है.

ऐतिहासिक महत्व

स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार बाबा दानीनाथ मंदिर का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना माना जाता है. कहा जाता है कि प्राचीन समय में यह स्थान घने जंगलों से घिरा हुआ था. यहां तत्कालीन एसडीओ के माध्यम से शिवलिंग का अस्तित्व मिलने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना शुरू की. समय के साथ श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गई और बाद में स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया गया. तब से यह मंदिर क्षेत्र के प्रमुख शिवधाम के रूप में स्थापित है. सावन, महाशिवरात्रि एवं अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. हिंदू धर्म ।ए श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है. इस माह सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं बाबा भोलेनाथ अवश्य पूर्ण करते हैं.


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Author: Abhishek

Published by: Sweta Vaidya

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