प्यास बुझाए या करियर बनाए; 3 किमी दूर नदी से पानी लाने को मजबूर बच्चे

दुमका के डोमपाड़ा में भीषण पेयजल संकट है, जहाँ 700 लोग 6 महीने से बंद सोलर जलमीनार के कारण पानी के लिए 3 किमी दूर नदी जाने को मजबूर हैं. यह स्थिति बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं की दिनचर्या को भी प्रभावित कर रही है.

संवाददाता, दुमका: दुमका शहर से सटे सरुवा पंचायत के डोमपाड़ा में गंभीर पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का सब्र शनिवार को टूट गया. पानी की समस्या से परेशान महिला, पुरुष और बच्चे विजयपुर के पास सड़क पर उतर गये और सड़क जाम कर दिया. करीब दो घंटे तक आवागमन बाधित रहा. सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतार लग गयी, जिससे राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा.

ग्रामीणों का कहना था कि पिछले कई महीनों से पानी के लिए भटकने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ. ऐसे में सड़क पर उतरकर अपनी आवाज उठाने के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा था.

छह माह से बंद है सोलर जलमीनार

करीब 700 की आबादी वाले डोमपाड़ा में पेयजल संकट लंबे समय से बना हुआ है. गांव में एक सोलर जलमीनार है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार यह करीब छह माह से बंद पड़ी है. इसके अलावा सप्लाई वाटर के दो स्टैंड पोस्ट हैं, लेकिन इतनी बड़ी आबादी के लिए दोनों स्टैंड पोस्ट पर्याप्त नहीं हैं.

बंद सोलर जलमीनार.| Prabhat Khabar Network

ग्रामीणों का कहना है कि किसी तरह इन स्टैंड पोस्ट से पीने के पानी का इंतजाम हो जाता है, लेकिन नहाने, कपड़े और बर्तन धोने जैसी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी की समस्या बनी रहती है.

तीन किलोमीटर दूर नदी से लाना पड़ रहा पानी

डोमपाड़ा के ग्रामीणों की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उन्हें पानी के लिए करीब तीन किलोमीटर दूर नदी तक जाना पड़ता है. सुबह होते ही घरों में पानी जुटाने की चिंता शुरू हो जाती है. महिलाएं और बच्चे पानी के बर्तन लेकर नदी की ओर निकलते हैं.

शहर से सटे गांव की करीब 700 की आबादी के लिए नदी से पानी लाना अब रोजमर्रा की मजबूरी बन गयी है. ग्रामीणों के अनुसार, यदि गांव में पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था होती तो महिलाओं और बच्चों को इतनी दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती.

बरसात में बढ़ जाता है नदी में खतरा

बरसात के मौसम में ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है. नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण वहां से पानी लाना जोखिम भरा हो जाता है. पानी की जरूरत पूरी करने के लिए ग्रामीणों को तेज बहाव के खतरे के बीच नदी तक जाना पड़ता है.

ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर पानी की जरूरत है और दूसरी ओर नदी का बढ़ता खतरा. ऐसी स्थिति में गांव में स्थायी पेयजल व्यवस्था नहीं होना चिंता का विषय है.

पानी जुटाएं या पढ़ाई करें, बच्चों के सामने दोहरी चुनौती

पेयजल संकट का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है. छात्रा राधिका ने बताया कि पानी जुटाने में काफी समय चला जाता है. इससे पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय निकालना मुश्किल होता है. नहाने, कपड़े और बर्तन धोने के लिए भी पानी का इंतजाम करना पड़ता है.

ग्रामीण गूंजा कुमारी और चेतकी देवी ने बताया कि पानी के लिए रोज जद्दोजहद करनी पड़ती है. घर के दूसरे कामों के साथ पानी लाने की जिम्मेदारी भी बढ़ गयी है. उनका कहना है कि गांव में जलमीनार मौजूद होने के बावजूद उसका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है.

मुखिया के खिलाफ भी ग्रामीणों में आक्रोश

पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों में पंचायत की मुखिया के खिलाफ भी आक्रोश है. ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या की शिकायत करने पर फंड उपलब्ध नहीं होने की बात कही जाती है.

ग्रामीणों का कहना है कि फंड की कमी का हवाला देने के बजाय बंद पड़ी जलमीनार को जल्द चालू कराने और तत्काल वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था करने की जरूरत है.

जलमीनार चालू कराने और स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीण मंटू मिर्धा ने कहा कि समस्या लंबे समय से बनी हुई है. सोलर जलमीनार करीब छह महीने से बंद है और लोगों को पानी के लिए नदी पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

ग्रामीणों ने बंद सोलर जलमीनार को तत्काल चालू कराने के साथ गांव की आबादी के अनुरूप पर्याप्त पेयजल की स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है.

सड़क जाम के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि पानी कोई सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की बुनियादी जरूरत है. तीन किलोमीटर दूर नदी से पानी ढोने की मजबूरी आखिर कब खत्म होगी, यही सवाल डोमपाड़ा के ग्रामीणों के सामने है.

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By Anand Jayswal

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