संवाददाता, दुमका : जामा प्रखंड के पलासबनी गांव का भालुसुगिया टोला आज भी पक्की सड़क की बाट जोह रहा है. करीब 15 घरों की आबादी वाले इस टोले के ग्रामीणों के लिए मुख्य सड़क तक पहुंचना अब भी किसी चुनौती से कम नहीं है. पलासबनी के मांझी टोला तक पक्की सड़क पहुंच चुकी है, लेकिन करीब एक किलोमीटर दूरी पर स्थित भालुसुगिया टोला सड़क सुविधा से वंचित है. बरसात में कच्चा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाने से ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है.
दो दशक पहले हुआ था मिट्टी-मोरम का काम
ग्रामीणों के मुताबिक करीब दो दशक पहले टोले तक पहुंचने वाले रास्ते में मिट्टी-मोरम का काम कराया गया था. रास्ते में पुल-पुलिया का भी निर्माण कराया गया, लेकिन इसके बाद सड़क को पक्का करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई.
ग्रामीण लंबे समय से करीब एक किलोमीटर सड़क को पक्की कराने की मांग करते आ रहे हैं. उनका कहना है कि आसपास के इलाकों में सड़क सुविधा का विस्तार हो रहा है, लेकिन भालुसुगिया टोला आज भी बुनियादी सुविधा से वंचित है.
बीमारी में एक किलोमीटर पैदल चलने की मजबूरी
सड़क के अभाव में सबसे अधिक परेशानी स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में होती है. ग्रामीणों के अनुसार एंबुलेंस टोले तक नहीं पहुंच पाती. मरीजों और गर्भवती महिलाओं को किसी तरह करीब एक किलोमीटर पैदल या अन्य साधन से मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है. इसके बाद ही एंबुलेंस की सुविधा मिल पाती है.
रात के समय या बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है. ऐसे समय में मरीज को मुख्य सड़क तक पहुंचाना परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है.
बरसात में कीचड़ और गड्ढों से आवागमन मुश्किल
वर्तमान बरसात में कच्चे रास्ते की स्थिति बेहद खराब है. जगह-जगह कीचड़ और गड्ढे बन जाने से साइकिल और मोटरसाइकिल से आवागमन मुश्किल हो गया है. कई हिस्सों में पैदल चलना भी परेशानी भरा हो गया है.
ग्रामीणों का कहना है कि रोजमर्रा के काम के लिए उन्हें इसी रास्ते से मुख्य सड़क तक जाना पड़ता है. खराब रास्ते के कारण समय के साथ-साथ दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है.
बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा असर
सड़क की बदहाली का असर टोले के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है. बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र और स्कूल जाने के लिए इसी खराब रास्ते से गुजरना पड़ता है. बरसात में रास्ते की स्थिति खराब होने के कारण बच्चों की नियमित आवाजाही प्रभावित होती है.
ग्रामीणों का कहना है कि पक्की सड़क बनने से बच्चों को स्कूल आने-जाने में सुविधा होगी और उनकी पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी.
शादी-विवाह में भी होती है परेशानी
टोले में शादी-विवाह और अन्य सामाजिक आयोजनों के दौरान सड़क की समस्या और अधिक महसूस होती है. चार पहिया वाहन मुख्य सड़क के पास ही खड़े करने पड़ते हैं. इसके बाद लोगों को सामान और अन्य जरूरी चीजें करीब एक किलोमीटर तक पैदल लेकर टोले में पहुंचानी पड़ती हैं.
ग्रामीणों के अनुसार सड़क की कमी का असर उनके सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों पर भी पड़ता है.
कई बार गुहार, फिर भी नहीं निकला समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से आग्रह किया गया, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है. उनका कहना है कि जब आसपास के गांव और टोलों तक पक्की सड़क पहुंच रही है, तो भालुसुगिया टोला को भी मुख्य सड़क से जोड़ने की पहल होनी चाहिए.
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द करीब एक किलोमीटर सड़क का निर्माण कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यह सड़क उनके लिए महज आवागमन की सुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षित जीवन के लिए बुनियादी जरूरत है.
