भजनों, झांकियों और भंडारे के साथ संपन्न हुआ कथा महायज्ञ का सातवां दिन प्रतिनिधि, सरैयाहाट रैयाहाट प्रखंड के जमुआ गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ के सातवें दिन कथा पंडाल भक्तिमय माहौल से सराबोर रहा. कथा वाचक बाल व्यास चंदन शरण जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है. व्यक्ति को धर्म और सत्कर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है. उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल मनुष्यों ही नहीं, बल्कि समस्त जीव-जंतुओं के कल्याण का भी माध्यम है. महाराज ने युवाओं से अपनी संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों को संरक्षित रखने की अपील करते हुए कहा कि आधुनिकता की दौड़ में अपनी परंपराओं को नहीं भूलना चाहिए. कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माखन चोरी, मटकी फोड़, कंस वध तथा रुक्मिणी-कृष्ण विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया. इन प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गये. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण केवल इतिहास के पात्र नहीं, बल्कि जीवन के सच्चे मार्गदर्शक हैं. यदि मनुष्य अपने जीवन की डोर उन्हें सौंप दे तो जीवन की कठिनाइयों पर विजय पाना सरल हो जाता है. कार्यक्रम में आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गयीं तथा भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे. कथा स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया.
कृष्ण भक्ति से जीवन का महाभारत जीतना आसान : चंदन शरण
कथा वाचक बाल व्यास चंदन शरण जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है.
