प्राकृतिक संतुलन के प्रहरी हैं लाभकारी कीट

सिरुवाडीह में बीएससी एग्रीकल्चर के छात्रों ने किसानों को किया जागरूक

दुमका. बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची से संबद्ध तिलकामांझी कृषि महाविद्यालय गोड्डा के बीएससी एग्रीकल्चर के सातवें सेमेस्टर के छात्र सच्चिदानंद उरांव, सुजीत कुमार महतो, अनंत आनंद एवं अनिमेष कुमार प्रधान ने शिकारीपाड़ा के सिरुवाडीह के बंगाली टोला में किसानों के बीच लाभकारी कीटों को लेकर जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र, दुमका के प्रधान वैज्ञानिक डॉ अमृत कुमार झा तथा गोड्डा से आए शिक्षकों मिस उपाली किस्कू व डॉ जेन्नी प्रिया एक्का के निर्देशन में संपन्न हुआ. कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों एवं आम लोगों को यह जानकारी देना था कि मधुमक्खी, लेडीबर्ड भृंग, परजीवी ततैया जैसे लाभकारी कीट कृषि उत्पादन बढ़ाने, परागण करने तथा प्राकृतिक रूप से हानिकारक कीटों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. छात्रों ने रैली, पोस्टर प्रदर्शनी एवं जनसंपर्क अभियान के माध्यम से ग्रामीणों को लाभकारी कीटों की उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने समझाया कि रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से लाभकारी कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे पर्यावरण असंतुलन उत्पन्न होता है और फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. छात्रों ने एकीकृत कीट प्रबंधन प्रणाली, जैविक कीटनाशकों के प्रयोग तथा कीटों के प्राकृतिक आवास संरक्षण जैसे पर्यावरण अनुकूल उपायों की भी जानकारी दी. किसानों को कम लागत एवं टिकाऊ खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया. इस अवसर पर उपस्थित शिक्षकों एवं कृषि विशेषज्ञों ने छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम किसानों को वैज्ञानिक एवं पर्यावरण सुरक्षित खेती की ओर अग्रसर करते हैं. स्थानीय किसानों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई और लाभकारी कीटों से फसल उत्पादन में होने वाले लाभों को साझा किया. कार्यक्रम के अंत में सभी ने लाभकारी कीटों के संरक्षण एवं पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का संकल्प लिया.

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Published by: Rakesh kumar

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