100 करोड़ की जलापूर्ति योजना 7 साल बाद भी अधूरी,बासुकिनाथ में नल के पानी का इंतजार

बासुकिनाथ में 100 करोड़ की जलापूर्ति योजना सात साल बाद भी अधूरी है. 21 हजार की आबादी को नल से शुद्ध पानी का इंतज़ार है. 60% काम पूरा होने के बावजूद एजेंसी एनएच से एनओसी न मिलने का हवाला दे रही है.

प्रतिनिधि, बासुकिनाथ: नगर पंचायत बासुकिनाथ में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गयी शहरी जलापूर्ति योजना सात साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है. योजना पूरी होने के बाद नगर पंचायत क्षेत्र की करीब 21 हजार आबादी को नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन योजना के अधूरे रहने के कारण नगरवासियों को अब भी पेयजल के लिए वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

वर्ष 2019 में राज्य योजना के तहत बासुकिनाथ शहरी जलापूर्ति योजना के लिए 57.77 करोड़ रुपये की तकनीकी स्वीकृति मिली थी. इसके अलावा मयूराक्षी नदी में दो बियर निर्माण के लिए 42.15 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गयी थी. दोनों योजनाओं की कुल लागत करीब 99.92 करोड़ रुपये बतायी गयी है.

योजना के तहत नगर पंचायत बासुकिनाथ के सभी 12 वार्डों में जलापूर्ति की व्यवस्था की जानी है.

इंटेक वेल और जल शोधन संयंत्र का काम धीमा

सरडीहा गांव के समीप इंटेक वेल और डब्ल्यूटीपी यानी जल शोधन संयंत्र का निर्माण कार्य अपेक्षित गति से नहीं हो सका है. वहीं कुछ स्थानों पर फिल्टर प्लांट की टंकी तथा गरडी और बेलगुमा में जलमीनारों का निर्माण भी वर्षों से अधूरा पड़ा है.

जलापूर्ति के लिए सभी वार्डों में पाइपलाइन बिछाने का काम भी अब तक पूरा नहीं हुआ है. कई मोहल्लों में पाइपलाइन नहीं पहुंचने के कारण गरीब और जरूरतमंद परिवार नल कनेक्शन से वंचित हैं.

25 किमी पाइपलाइन से छह हजार घरों तक पहुंचना है पानी

योजना के तहत करीब 25 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाकर लगभग छह हजार घरों तक पेयजल पहुंचाने की व्यवस्था की जानी है. दो नयी और दो पुरानी पानी टंकियों के माध्यम से नगर पंचायत के सभी 12 वार्डों में जलापूर्ति का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

बताया जा रहा है कि योजना का करीब 60 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है. शेष काम पूरा नहीं होने के कारण योजना का पूरा लाभ नगरवासियों को नहीं मिल पा रहा है.

सात साल बाद भी नल के पानी का इंतजार

करोड़ों रुपये की योजना शुरू होने के बावजूद समय पर काम पूरा नहीं होने से नगरवासियों में नाराजगी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जलापूर्ति योजना पूरी होने से नगर क्षेत्र में पेयजल संकट से काफी हद तक राहत मिल सकती थी.

गर्मी के दिनों में पेयजल संकट और गहरा जाता है. ऐसे में लोग योजना के जल्द पूरा होने और घरों तक नियमित नल का पानी पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं.

एजेंसी का दावा - एनएच से एनओसी नहीं मिलने से रुका काम

नगर पंचायत बासुकिनाथ शहरी जलापूर्ति योजना का कार्य नगर विकास विभाग, जुडको रांची की ओर से कराया जा रहा है. कार्य कराने की जिम्मेदारी रांची की उर्मिला आरसीपी को दी गयी है.

कार्यकारी एजेंसी के रितेश कुमार ने बताया कि योजना का काम वर्ष 2019-20 में शुरू हुआ था. दो जलमीनारों का निर्माण कार्य अधूरा है. एनएच से एनओसी नहीं मिलने के कारण काम आगे बढ़ाने में परेशानी हो रही है. पाइपलाइन बिछाने का कार्य भी अभी पूरा नहीं हुआ है

बासुकिनाथ नपं क्षेत्र में अधूरा पड़ा जलमीनार.| Prabhat Khabar Network

34 करोड़ की लागत से दो बियर का निर्माण पूरा

कार्यकारी एजेंसी के अनुसार जल संसाधन विभाग की ओर से हरिपुर में करीब 34 करोड़ रुपये की लागत से दो बियर का निर्माण पूरा किया जा चुका है.

एजेंसी का कहना है कि एनओसी मिलते ही शेष कार्य को सात से आठ महीने में पूरा कर नगर पंचायत क्षेत्र में जलापूर्ति शुरू कराने का लक्ष्य है. एनओसी को लेकर नगर विकास विभाग को भी पत्र लिखा गया है.

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अधिकारी बोले - जल्द शुरू कराया जाएगा काम

नगर पंचायत बासुकिनाथ के कार्यपालक पदाधिकारी सागेन मरांडी ने कहा कि बासुकिनाथ शहरी जलापूर्ति योजना का कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है. संबंधित अधिकारियों से इस संबंध में बातचीत हुई है.

उन्होंने बताया कि एनएच से एनओसी नहीं मिलने के कारण कार्य प्रभावित है. पाइपलाइन का कुछ कार्य एनएच क्षेत्र में होना है. संबंधित अधिकारियों से समन्वय कर जल्द कार्य शुरू कराने की दिशा में त्वरित पहल की जायेगी.

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By आदित्यनाथ पत्रलेख

आदित्यनाथ पत्रलेख वर्ष 2011 से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया, दोनों में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की बारीकियां सीखीं और राजनीतिक, सामाजिक तथा विकासात्मक मुद्दों पर सटीक एवं निष्पक्ष रिपोर्टिंग की। जनहित से जुड़े विषयों पर फोकस्ड रिपोर्टिंग और तथ्यों को सत्य एवं तटस्थता के साथ प्रस्तुत करना उनकी कार्यशैली की प्रमुख पहचान है।

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