सिमरा-जामा सड़क निर्माण में देरी पर आक्रोश, ग्रामीणों ने निकाला पैदल मार्च
जामा प्रखंड क्षेत्र में सिमरा से जामा तक सड़क निर्माण में लगातार देरी से ग्रामीणों में आक्रोश है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सितंबर 2023 में स्वीकृति मिली थी, लेकिन मात्र 20% कार्य पूरा हुआ है। पूर्व उपप्रमुख इंद्रकांत यादव के नेतृत्व में ग्रामीणों ने पैदल मार्च निकाल कर विरोध जताया। उन्होंने अनियमितताओं और निर्माण कार्य में ठहराव पर गंभीर चिंता व्यक्त की और शीघ्र गति न लाई जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। 14.5 किलोमीटर लंबे मार्ग की खराब स्थिति के कारण लोगों को दैनिक आवागमन में दिक्कतें और दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। सड़क निर्माण की तत्काल मजबूती ग्रामीणों की जिंदगी से जुड़ी है, और वे अपने संघर्ष को लेकर गंभीर हैं।
सिमरा-जामा सड़क निर्माण में देरी पर आक्रोश, ग्रामीणों ने निकाला पैदल मार्च
पीएमजीएसवाइ से सितंबर 2023 में ही मिली थी स्वीकृति प्रतिनिधि, जामा जामा प्रखंड क्षेत्र में सिमरा से जामा तक सड़क निर्माण कार्य में लगातार देरी से ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है. रविवार को उन्होंने पैदल मार्च निकालकर अपनी पीड़ा और विरोध व्यक्त किया. यह यात्रा पूर्व उपप्रमुख इंद्रकांत यादव के नेतृत्व में ढोढ़ली पंचायत के सिमरा गांव से शुरू होकर जामा प्रखंड मुख्यालय तक पहुंची. इस मार्ग से ढोढ़ली, सिमरा और तपसी पंचायत के लोग अस्पताल, प्रखंड कार्यालय, थाना, हाट-बाजार और जिला मुख्यालय तक आवागमन करते हैं, लेकिन सड़क की जर्जर स्थिति उन्हें रोजाना कठिनाइयों और दुर्घटनाओं का सामना करने पर मजबूर करती है.
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत इस सड़क निर्माण की स्वीकृति सितंबर 2023 में मिली थी. शिलान्यास तत्कालीन सांसद सुनील सोरेन ने किया था और निर्माण कार्य का ठेका पश्चिम बंगाल की कंपनी त्रिरूपति कंस्ट्रक्शन को दिया गया था. ग्रामीणों ने बताया कि विधायक डॉ. लोईस मरांडी की पहल पर बीते माह कार्य शुरू हुआ था, लेकिन मात्र तीन दिन बाद ही काम बंद हो गया. लगभग 14.5 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर दो वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद केवल 20 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है.
आक्रोश यात्रा सिमरा से हरिणगोहाल, सरैया, पिपरा, कदरजोरिया, बसबुटिया, दुबरीकदेली, हल्दीपट्टी, भोड़ाबादर, बेलकुपी होते हुए सुगनीबाद और जामा से बैसा चौक तक निकाली गई. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिया, पीसीसी सड़क और गार्डवाल के निर्माण में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्माण कार्य में तेजी नहीं लाई गई तो वे उग्र आंदोलन करने को विवश होंगे.
इस विरोध में मोहन राउत, अनिल टुडू, प्रदीप कुमार दर्वे, रामयश मांझी, सुजीत राउत, सुनील यादव, तारा देवी, रूपा देवी, आशा देवी, जीरा देवी, सुक्ति देवी, रधिया देवी, चांदमनी किस्कू, सोहागनी मुर्मू, सुभाष मंडल, शिवकुमार, उपेंद्र मंडल, ऋतिक, अरुण, जयनाथ, सत्यनारायण, रामजीत, तारणी, नरेश, भवेश कुमार, दीपक कुमार दर्वे सहित दर्जनों ग्रामीण शामिल हुए.
ग्रामीणों का यह कदम उनकी रोजमर्रा की कठिनाइयों और असुरक्षा की भावना को उजागर करता है. सड़क उनके जीवन का आधार है और इसके अधूरे रहने से उनकी उम्मीदें और संघर्ष दोनों बढ़ते जा रहे हैं.
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