सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हल्लाबोल, मांगो को लेकर पांच कार्यकर्ता बैठे भूख हड़ताल पर

सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय में प्रशासनिक अनियमितताओं और परीक्षा विभाग की मनमानी के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बेमियादी भूख हड़ताल शुरू कर दी है. पांच कार्यकर्ता छात्रहितों की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं. विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रहितों की लगातार अनदेखी का आरोप लगाया गया है.

दुमका : सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय में कथित तौर पर प्रशासनिक घपले और परीक्षा विभाग की मनमानी के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बेमियादी भूख हड़ताल शुरू कर दी है. पांच कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर बैठे हैं. पहले दिन विश्वविद्यालय परिसर में धरना स्थल पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एबीवीपी के विभाग संगठन मंत्री हिमांशु दुबे ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर हमला बोला.

छात्रहित की अनदेखी का आरोप

हिमांशु दुबे ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रहित के मुद्दों को लगातार नजरअंदाज कर रहा है. परीक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमाना टेंडर आवंटन और परिणाम में हो रही लगातार देरी से हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है.

15 सूत्री मांग पत्र का दिया हवाला

उन्होंने कहा कि परिषद ने समय रहते कुलपति को 15 सूत्री मांग पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन विवि प्रशासन की कुंभकर्णी नींद नहीं टूटी. अब यह लड़ाई केवल आश्वासनों से खत्म नहीं होगी.

मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात

हिमांशु दुबे ने कहा कि जब तक प्रभारी परीक्षा नियंत्रक को हटाया नहीं जाता, एनसीसीएफ टेंडर घोटाले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच नहीं होती और घटाई गई यूजी सीटें बहाल नहीं की जातीं, तब तक अनशन जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि यदि छात्रों के लोकतांत्रिक हक पर कुठाराघात हुआ, तो परिषद आर-पार की लड़ाई लड़ेगा.

विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी

धरना स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. आंदोलन में विकास भगत, सूरज कुमार, मनीष मंडल, संजय पाल, प्रहलाद शर्मा, वरुण चंद्र, दीवाना कुमार, राहुल कुमार, विकास ठाकुर, अमन साह, मनीष यादव, अनुज राय, नवदीप मंडल, पिंकी, सुनीता, रीमा, अंजली सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे.

ये हैं प्रमुख मांगें

  • एनसीसीएफ से जुड़े कार्यों व टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों व एजेंसियों पर कार्रवाई की जाए.
  • परीक्षा शुल्क और अन्य वित्तीय मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा छात्रों के डेटा को सुरक्षित विश्वविद्यालय सर्वर पर स्थानांतरित कर गोपनीयता सुनिश्चित की जाए.
  • विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों में कथित प्रशासनिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच हो.
  • प्रभारी प्राचार्यों की नियुक्ति व कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाए.
  • लंबित परीक्षाओं का जल्द आयोजन, समयबद्ध परिणाम प्रकाशन, पुनर्मूल्यांकन में पारदर्शिता और मूल्यांकन व्यवस्था की समीक्षा हो.
  • विश्वविद्यालय में एलएलबी और बीएड पाठ्यक्रम की शुरुआत हो.
  • जनरल और ओबीसी छात्रावास की व्यवस्था हो.
  • विश्वविद्यालय में पुस्तकालय का संचालन हो और घटाई गई यूजी सीटों को बहाल किया जाए.

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By Anand Jayswal

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