दुमका : रजत जयंती वर्ष पर आयोजित पोपुलर व्याख्यानमाला की आठवीं कड़ी में बुधवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ एससी शर्मा ने भारत में उच्च शिक्षा में गुणवत्ता के विमर्श का पुनर्मूल्यांकन किया.
अपने एक घंटे से अधिक लंबे भाषण के दौरान प्रो शर्मा ने गुणवता की विभिन्न तकनीकी परिभाषाओं का विश्लेषण करते हुए बताया कि भारत में सन्दर्भ-केन्द्रित परिभाषा के आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि भारतीय उच्च शिक्षा व्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी व्यवस्थाओं में से एक है,
जिसकी अपनी विशिष्ट चुनौतियां हैं तथा जिनका समाधान करना जरूरी है. विश्वभर में उच्च शिक्षा को आकर्षक बनाने के लिए जो रैंकिंग की तकनीक का सहारा लिया जाता है उसका अंधा अनुसरण करना हमारे लिए घातक है.
डॉ शर्मा ने कहा कि अध्यापन के पैमानों पर जोर देना चाहिए और उसके बाद ही शोध की उम्मीद के जा सकती है. विदेशी विश्वविद्यालयों में छात्रों का अनुपात कम होता है तथा सामाजिकी परिस्थितियां भिन्न हैं.
इसके पूर्व कार्यक्रम का उदघाटन करते हुए कुलपति प्रो कमर अहसन ने कहा कि झारखड जैसे प्रदेशों में छात्र-छात्राओं में संभावनाएं हैं. उनको निखारने के लिया पूर्ण रूप से प्रयत्न करना होगा. क्लास में प्रश्न करने की आदत डालने होगी. शिक्षा का मूल आधार विद्यार्थियों की तर्क क्षमता पर निर्भर है. ज्ञान को जीवन से जोड़ने की एक ललक पैदा करना शिक्षक का कार्य है.
प्रतिकुलपति प्रो एसएन मुंडा ने टिपण्णी करते हुए कहा कि हमें शैक्षणिक योजना बनाने के पूर्व किसी भी क्षेत्र की सांस्कृतिक विशेषता को ध्यान में रखना होगा. पूर्व प्रतिकूलपति प्रो प्रमोदिनी हांसदा ने देश भर के लिए एक यूनिफार्म स्तर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया.
हालांकि प्रो शर्मा के अनुसार अत्यधिक एकरूपता लाने से विश्वविद्यालयों की स्वायतता और निजी चरित्र प्रभावित होते हैं. इस व्याख्यान में प्रो वाइपी राय, डॉ गगन ठाकुर, डॉ हशमत अली, डॉ पीके राय, डॉ टीपी सिंह, डॉ संजीव कुमार,डॉ राजीव सिन्हा, प्रो अच्युत चेतन,
बीएड कॉलेज के शिक्षक एवं छात्र, एसपी लॉ कॉलेज के छात्रों के अलावे राजनीति विज्ञान, जीव विज्ञान एवं अन्य विभाग के छात्र छात्राये काफी बड़ी संख्या में उपस्थित थे. कार्यक्रम के प्रारंभ में एसपी लॉ कॉलेज की छात्राओं ने पुष्प गुच्छ देकर अतिथियों का स्वागत किया.
डॉ संजीव कुमार सिन्हा ने विषय प्रवेश किया एवं अतिथियों का परिचय करवाया. धन्यवाद ज्ञापन डॉ प्रमोदिनी हांसदा ने किया. मंच संचालन इस व्याख्यानमाला के संयोजक डॉ अजय सिन्हा ने किया.
