आहुति के साथ 51 कुंडीय गायत्री महायज्ञ संपन्न

शांतिकुंज हरिद्वार से आये वेद विशेषज्ञ विद्वान आचार्यों ने महायज्ञ में आहुति देने पधारे विशिष्ट अतिथियों का टीका चंदन लगाकर व गुरुदेव का साहित्य प्रदान कर सम्मान किया गया.

प्रतिनिधि, दुमका नगर 51 कुंडीय राष्ट्र शौर्य समृद्धि गायत्री महायज्ञ का गुरुवार को यज्ञ मैदान में समापन दिवस पर आहुति देने के लिए अधिक भीड़ उमड़ी. शांतिकुंज हरिद्वार से आये वेद विशेषज्ञ विद्वान आचार्यों ने महायज्ञ में आहुति देने पधारे विशिष्ट अतिथियों का टीका चंदन लगाकर व गुरुदेव का साहित्य प्रदान कर सम्मान किया गया. विशिष्ट अतिथियों ने भी माला पहना कर व पगड़ी पहनाकर आचार्यों का आशीर्वाद लिया. वैदिक ऋचाओं के मंत्रोच्चार के साथ गुरुवंदना से इस महायज्ञ के समापन दिवस के कर्मकांड की शुरुआत की गयी. वैदिक मंत्रोचारण से पूरा वातावरण गुंजायमान हो गया. वेद विशेषज्ञ विद्वान आचार्यों द्वारा कर्मकांड की महत्ता, कर्मकांड विशेष के पीछे आधारित तर्क तथा व्यक्ति व समाज के लिए उसकी उपादेयता को भी बीच-बीच में बताया जा रहा था. कर्मकांडों के बीच पर प्रासंगिक युग संगीत भी गाया जा रहा था. गायत्री महायज्ञ के समापन दिवस में भी अनेकों श्रद्धालुओं ने गायत्री ज्ञान दीक्षा लिया. बुधवार की तरह गुरुवार को भी कई श्रद्धावान शिष्यों ने अपने-अपने घरों में विधिवत रूप से आचार्यों द्वारा वेद स्थापना कराया. सर्वप्रथम मुकेश चौधरी ने वेद स्थापना कराया. यज्ञकर्ताओं की भारी भीड़ के कारण 4 पालियों में यज्ञ संपन्न हुआ. मां गायत्री की आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ. अनुष्ठान के उपरांत समाजसेवी सुमित पटवारी के विशेष सहयोग से भंडारा का भी आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया. मुख्य ट्रस्टी प्रमोद कुमार ने प्रखंड समन्वयकों, सभी गणमान्य नागरिकों एवं अन्य कार्यकर्ताओं को उनके समर्पित सहयोग व मेहनत के लिए धन्यवाद दिया.

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Published by: Anand jaswal

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