रानीश्वर : मेहनती लोगों के लिए कृषि कार्य आज के समय में भी आमदनी का अच्छा विकल्प है. जमीन की कमी या पूंजी का अभाव भी इसमें कोई बाधा नहीं है. ऐसा साबित कर दिया है रानीश्वर के कुछ मेहनतकश युवा किसानों ने. अच्छी पढ़ाई करने के बाद सब्जी की खेती कर जिंदगी संवार रहे […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
रानीश्वर : मेहनती लोगों के लिए कृषि कार्य आज के समय में भी आमदनी का अच्छा विकल्प है. जमीन की कमी या पूंजी का अभाव भी इसमें कोई बाधा नहीं है. ऐसा साबित कर दिया है रानीश्वर के कुछ मेहनतकश युवा किसानों ने. अच्छी पढ़ाई करने के बाद सब्जी की खेती कर जिंदगी संवार रहे हैं. सुखजोड़ा गांव के किसान नरेश मंडल ने सिर्फ टमाटर कर खेती कर अच्छी आमदनी की है. एक छोटा चार पहिया वाहन इसी टमाटर की उपज से खरीदी है.
चार पहिया वाहन के माध्यम से ही अपनी उपज को दूर की मंडी तक पहुंचा कर ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं. जमीन में सोना उगा रहे हैं. सिंचित क्षेत्र हो या असिंचित. विभिन्न गांवों के युवा अपनी जमीन पर या लीज की जमीन लेकर खेती कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं. असिंचित क्षेत्र रहने पर ऐसे युवा पंप सेट के सहारे नदी व जोरिया से पटवन कर सालों भर खेती कर रहे हैं. खरीफ की तुलना में रबी खेती तथा सब्जी उत्पादन में ज्यादा लाभ है. ऐसे युवा सब्जी उत्पादन में भी अपना खूंटा गाढ़ रहे हैं. सब्जी की खेती में नांदना, सुखजोड़ा, कुमिरखाला, कुमिरदहा, महिशबाथान, जामग्राम आदि गांवों के किसान अग्रणी है. खेती के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए नांदना गांव के किसान सुशील चंद्र मांझी को राज्य स्तर पर पुरस्कृत भी किया गया था. तत्कालीन कृषि मंत्री नलीन सोरेन के हाथों श्री मांझी सम्मानित हुए थे.
केवल मूली बेच कमाया 10 हजार
सुखजोड़ा के कृषक हीरालाल मंडल ने बताया कि गांव में पटवन की कोई सरकारी सुविधा नहीं है. स्वयं के द्वारा बनाये गये कच्चा कुआं में मोटर लगा कर सब्जी की खेती कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं. सिर्फ मूली बेच कर ही 10 हजार की कमाई हुई है. इसके अलावे खेतों में पालक व अन्य सब्जी तथा रबी फसल की खेती कर रहे हैं.
वनमाली मंडल ने बताया कि वे तीस बीघा जमीन पर खेती कर रहे हैं. धान व गेहू के अलावा सरसो, आलू तथा सब्जी की खेती करता हूं. गांव में नहर है, पर करीब डेढ़ दशक से नहर में पानी नहीं पहुंचता है. जोरिया व कुंआ में मोटर के सहारे खेती कर रहे हैं.
सब्जी की खेती से जिंदगी संवार रहे आधा दर्जन गांव के युवा
पहली बार हो रही मूंगफली की खेती
कुमिरखाला के प्रदीप सिंह ने बताया कि गांव में इस साल आत्मा के सहयोग से मूंगफली की खेती पहली बार की है. इस क्षेत्र में मिशाल कायम किया है. गांव के अन्य युवाओं के साथ सामूहिक रूप से मूंगफली की खेती कर अच्छा आमदनी हुई है. फिलहाल खेतों में रबी फसल के साथ साथ सब्जी भी है. सब्जी बेचकर ज्यादा आमदनी होती है.
अड्डाबाजी में नहीं, खेत में गुजरते हैं वक्त
संदीप बताते हैं कि गांव के युवाओं का वक्त कहीं अड्डेबाजी में नहीं, खेत में में फसल उत्पादन में बीतता है. युवा खेती में ही खुद को लगा रहे हैं. उनको मिट्टी से लगाव बढ़ रहा है. अपने को स्वावलंबी बना रहे हैं. धान की फसल के अलावा रबी व सब्जी की खेती में अच्छी आमदनी हो रही है. खेतों में बैगन, गोभी, आलू, सरसों की फसल लहालहा रही है. टमाटर भी है.