सदर अस्पताल l मॉनिटर भी लंबे समय से खराब, सर्जन नहीं रख पाते मरीजों पर नजर
दुमका : दुमका सदर अस्पताल में प्रसव के लिए ऑपरेशन थियेटर की अलग से व्यवस्था नहीं रहने के कारण चिकित्सक तथा मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. सदर अस्पताल में केवल एक इमरजेंसी ऑपेरशन थियेटर है. इसके भरोसे मरीजों का ऑपरेशन किया जाता है. इमरजेंसी ऑपरेशन थियेटर में दो बेड है. पर […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
दुमका : दुमका सदर अस्पताल में प्रसव के लिए ऑपरेशन थियेटर की अलग से व्यवस्था नहीं रहने के कारण चिकित्सक तथा मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. सदर अस्पताल में केवल एक इमरजेंसी ऑपेरशन थियेटर है. इसके भरोसे मरीजों का ऑपरेशन किया जाता है. इमरजेंसी ऑपरेशन थियेटर में दो बेड है. पर उसमें भी आवश्यकता के अनुरुप उपकरण व यंत्र नहीं है. ऑपरेशन थियेटर में छोटे-बड़े ऑपरेशन के अलावा सीजर, नसबंदी ऑपरेशन व हड्डी से जुड़े मरीजों का ऑपरेशन किया जाता है.
अधिकांश दिन देखा जाता है कि ऑपरेशन के दौरान गंभीर मरीज पहुंच जाने पर भी उस मरीज को ऑपरेशन थियेटर में ले जाया जाता है. उस दौरान मरीज के साथ मरीज के परिजन व सहयोगी भी ऑपरेशन थियेटर में अंदर घूस जाते हैं. ऑपरेशन चलने के दौरान इस प्रकार की स्थिति से मरीज के इलाज में खतरा बढ़ जाता है. इमरजेंसी ऑपरेशन थियेटर में कई मामूली उपकरण भी नहीं रहने से मरीज को रेफर करना मजबूरी बन जाती है. सदर अस्पताल में तीन ऑपरेशन थियेटर की आवश्यकता है. जेनरल सर्जरी, प्रसव और हड्डी से संबंधित रोगियों के इलाज के अलग-अलग ऑपरेशन थियेटर की आवश्यकता है. ताकि अस्पताल के मरीजों सही समय पर समुचित इलाज किया जा सके. कई बार तो देखने को मिलता है कि मरीज और चिकित्सक को ऑपरेशन थियेटर खाली होने का इंतेजार करना पड़ता है.
ऑपरेशन थियेटर में बहुत-सी कमी है. इसके बावजूद मरीजों की स्थिति को देखते हुए काम करना पड़ता है. ऑपरेशन थियेटर में लगा मॉनीटर लंबे समय से खराब पड़ा है. इसलिए ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति देखने में काफी परेशानी होती है.
आधुनिक उपकरण व यंत्र की सुविधा नहीं है. इससे काफी परेशानी का सामन करना पड़ता है. ओटी के अंदर रोशनी की समुचित व्यवस्था नहीं है. दिन में किसी प्रकार काम कर लिया जाता है लेकिन रात में अगर ऑपरेशन की जाती है तो परेशानी होती है. ऑपरेशन थियेटर में ठंड के दौरान ब्लोअर की सुविधा नहीं रहने से मरीजों को भी काफी परेशानी होती है.
डा संतोष कुमार साह, महिला रोग विशेषज्ञ
इमरजेंसी ऑपरेशन थियेटर में विभिन्न प्रकार के मरीज आते हैं. जिनका इलाज किया जाता है. वार्ड में भर्ती मरीजों का भी इलाज वहीं होता है. लेकिन वैसे मरीज जो केवल ऑपरेशन कराने के लिए सदर अस्पताल आते है. उन मरीजों का ऑपरेशन अलग से बने ऑपरेशन थियेटर में होना चाहिए, ताकि मरीजों को संक्रमण से बचाया जा सके. सदर अस्पताल में बेहोशी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है. दो चिकित्सक है. लेकिन उनसे भी अन्य ड्यूटी ली जाती है.