रोष. जेल प्रशासन द्वारा मौत की सूचना नहीं देने पर भड़के बबलू के परिजन
भाई प्रदीप श्रीवास्तव ने कहा 13 को बातचीत की थी, तो ठीक थी तबीयत
अचानक मौत होने पर उठाया सवाल
दुमका : 20 साल पुराने भोमा सिंह हत्याकांड मामले में सजा काट रहे बबलू श्रीवास्तव उर्फ अश्विनी के शव लेने आये उसके परिजनों ने सुबह छह से 9 बजे तक दुमका सेंट्रल जेल के गेट को जाम किये रखा. बबलू के भाई प्रदीप श्रीवास्तव का आरोप था कि जेल प्रशासन ने उनके परिवार को बबलू की मौत से संबंधित कोई जानकारी नहीं दी. रांची में सोशल मीडिया से जानकारी मिलने के बाद रात में 10 बजे के करीब वे लोग दुमका पहुंचे. बावजूद जेल प्रशासन ने उसकी मौत के बारे में कुछ नहीं बताया. प्रदीप के मुताबिक 13 दिसंबर को ही उसके बड़े भाई बबलू से फोन पर बातचीत हुई थी. उस समय वह बिल्कुल ठीक था. ऐसे में अचानक से उसकी मौत कैसे हो सकती है.
जेल अधीक्षक के आने का कर रहे थे इंतजार : आक्रोशित परिजन जेल अधीक्षक को बुलाने और मामले में सबकुछ स्पष्ट करने की मांग कर रहे थे. उनके न पहुंचने तक परिजनों ने जेल गेट के सामने अपनी कार लगा दी. इस दौरान न तो वे किसी को जेल के मुख्य गेट के अंदर जाने दे रहे थे और न ही बाहर आने दे रहे थे. क्वार्टर में रहनेवाले बच्चे इससे समय पर स्कूल नहीं जा सके, जबकि जेल के कई कर्मी अंदर नहीं आ सके.
पदाधिकारियों के पहुंचने पर हुए शांत
जेल गेट जाम किये जाने पर कार्रवाई की चेतावनी देने व जेल अधीक्षक भगीरथ कार्जी, एसडीओ राकेश कुमार, डीएसपी अशोक कुमार सिंह एवं पुलिस इंस्पेक्टर अजय केशरी के पहुंचने तथा समझाये जाने के बाद परिजन शांत हुए और फिर शव को प्राप्त करने पोस्टमार्टम हाउस गये. रांची के धुर्वा के रहनेवाले बबलू श्रीवास्तव की मौत 14 अगस्त की रात इलाज के क्रम में सदर अस्पताल में हो गयी थी.
एसएसपी व हटिया थाना को दी थी जानकारी
बंदी के मौत की सूचना उनके परिजनों को देने के लिए होटवार जेल के अधीक्षक के माध्यम से विशेष दूत भेजा गया था. वहां के एसएसपी व हटिया थाना को भी इससे संबंधित जानकारी भेजी गयी थी. मृतक बंदी के परिजनों ने पत्र प्राप्ति से इनकार कर दिया था. इसकी रिपोर्ट भी होमगार्ड के जवान जयराम शर्मा ने की है.
भगीरथ कार्जी, जेल अधीक्षक
